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सम्मान की जगह वेतन के लिए होना पड़ रहा परेशान

लॉकडॉउन में राजकीय सेवा के दौरान मज़बूरी में होम क्वारन्टीन रहे आधा दर्जन वनकर्मियों से उपवन संरक्षक ने लिखित में आदेश जारी कर मांगा प्रमाणपत्र
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सम्मान की जगह वेतन के लिए होना पड़ रहा परेशान

सम्मान की जगह वेतन के लिए होना पड़ रहा परेशान

जोधपुर. लॉकडाउन में बढते वन्यजीव शिकार प्रकरण पर अंकुश लगाने में लगातार सक्रिय रह कर अपनी ड्यूटी करने वाले वन विभाग वन्यजीव उडऩदस्ता के वनकर्मियों को सम्मान की जगह अपने वेतन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल वनविभाग वन्यजीव उडऩदस्ता टीम के सदस्य वन्यजीव शिकार प्रकरण में गवाह का बयान लेने और मौका मुआयना करने विष्णु ढाणी लूणावास खारा क्षेत्र में गए। इसमें क्षेत्रीय वन अधिकारी अशोकाराम पंवार के साथ वन रक्षक मगाराम सैन, बंशीलाल, सुरेश कुमार एवं चालक रामरतन शामिल थे। शिकार प्रकरण के जिस गवाह के बयान लिए वह उसी दिन कोरोना पॉजीटिव निकला। वन अधिकारी ने पूरी टीम को 1 जून से 14 जून तक होम क्वारन्टीन होने के मौखिक निर्देश दिए थे। इसी तरह के अन्य मामले में वन रक्षक भागीरथ लटियाल को भी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क आ जाने पर 24 मई से 7 जून तक होम क्वारन्टीन होना पड़ा था। क्वारन्टीन अवधि के बाद ड्यूटी पर पहुंचे सभी वनकर्मियों को उप वन संरक्षक महेश कुमार ने वेतन कटौती का नोटिस थमाते हुए सीएमएचओ का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बिल शाखा को वेतन नहीं बनाने के निर्देश

वन अधिकारी ने लिखित प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करने वाले वन कर्मियों का जून माह का वेतन बिल नहीं बनाने के लिए बिल शाखा कार्यालय को निर्देश दिए।

बिना गलती की सज़ा भुगत रहे वनकर्मी

आधा दर्जन कर्मचारियों को अलग अलग मामलों में कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने के बाद होम क्वारन्टीन होने पर वन्यजीव शिकार रोकथाम, घायल वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन और विभागीय आवश्यक कार्य के लिए सहायक वनपाल पुखराज सैन और वनपाल चैनाराम को माचिया जैविक उद्यान मचिया पार्क के क्षेत्रीय वन अधिकारी का कार्यभार संभालने के लिए लिखित में आदेश जारी किया गया था। क्वारन्टीन वन कर्मियों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रमाण पत्र मांगने से कर्मचारी मानसिक तौर पर परेशान है। जब पूरे मामले को लेकर उपवन संरक्षक से फोन पर सम्पर्क की कोशिश की गई तो जवाब देने से कतराते रहे।