
Bilara Mandi Bhav: बिलाड़ा। राजस्थान में अपनी विशिष्ट पहचान कायम कर चुकी बिलाड़ा कृषि उपज मंडी किसी एक उपज के कारोबार तक सीमित नहीं रहकर हर सीजन में विभिन्न फसलों में रिकॉर्ड बना रही है । यहां विभिन्न जिलों और गांवों से किसान अपनी उपज बेचने पहुंचते हैं । मंडी में व्यापारियों के अनुसार कपास के भावों में हाल ही में तेजी देखी गई है । रुई खंडी में करीब 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है ।
अचानक आई इस तेजी से जहां व्यापारियों को लाभ हुआ है, वहीं किसानों को उचित भाव नहीं मिलने से निराशा हुई है। सीजन के दौरान कपास के भाव 7500 से 8500 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे । कई किसानों ने दो माह तक इंतजार के बाद भी अपेक्षित दाम नहीं मिलने पर 8000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास कपास बेचा । इससे सफेद सोने के नाम से प्रसिद्ध कपास की चमक फीकी पड़ गई।
व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर कपास पर पड़ा है । कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और पॉलिस्टर फाइबर के महंगे होने से सूती धागे और कपास की मांग बढ़ी है ।
व्यापारी अशोक राठौड़ के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास का भाव 72-74 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 90-92 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गया है । इससे एक खंडी कपास का भाव 52 हजार रुपए से बढ़कर लगभग 62 हजार रुपए तक पहुंच गया है । पिछले कुछ दिनों से लगातार तेजी बनी हुई है और भाव 8500 से 9000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं ।
हालांकि इस तेजी का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि अधिकांश किसानों के पास अब बिक्री के लिए कपास का स्टॉक नहीं बचा है। इसका फायदा उन व्यापारियों को मिल रहा है जिन्होंने पहले से भंडारण कर रखा था।
कपास की खेती में लागत अधिक आती है, लेकिन भाव उचित नहीं मिलने से किसान निराश हैं और कपास की बुवाई में भी कमी आ रही है ।
सीजन में भाव कम रहने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है , जबकि बाद में भाव बढ़ने पर व्यापारियों को अधिक लाभ मिल जाता है ।
Updated on:
14 May 2026 01:12 pm
Published on:
14 May 2026 01:12 pm
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