
राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, बिना अनुमति अब नहीं कटेगा खेजड़ी का पेड़ (पत्रिका क्रिएटिव फोटो)
Rajasthan High Court Strict on Khejri Tree Cutting: जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने खेजड़ी पेड़ों की कटाई को लेकर दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया है कि किसी भी पेड़ को कानून के तहत पूर्व अनुमति के बिना नहीं काटा जाए। इसकी सूचना राज्य सरकार की ओर से गठित समिति को भी दी जाए। कोर्ट ने 1730 में खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए खेजड़ली में हुए बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शायद अब फिर समय आ गया है कि तत्कालीन महाराजा की तरह आज के शासक भी पर्यावरण संतुलन और पेड़ों की रक्षा के लिए फरमान जारी करें।
न्यायाधीश अरूण मोंगा और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि तकनीकी विकास के नाम पर प्रकृक्ति को नुकसान पहुंचाने के सवाल पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। खंडपीठ ने यह आदेश श्रीजंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार की सोलर पावर नीति की आड़ में बड़े स्तर पर हरियाली खत्म की जा रही है और खेजड़ी के पेड़ों को काटा जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विजय बिश्नोई ने तर्क दिया कि प्रभावित भूमि अधिकतर बंजर है और खेजड़ी ही ऐसी प्रजाति है, जो क्षेत्र की कठोर जलवायु में जीवित रह सकती है।
खंडपीठ ने कहा कि खेजड़ी पारिस्थितिकी महत्व का एक दुर्लभ रेगिस्तानी वृक्ष है, जो बहुत कम संख्या में उगता है। इसके बावजूद इसे काटने की योजना बनाई जा रही है। कारण सोलर पावर प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। यह विडंबना चौंकाने वाली है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि समिति एक भी पेड़ की कटाई से बचने और अपूरणीय क्षति रोकने के लिए हर संभव विकल्प तलाशेगी।
याचिका में यह भी कहा गया कि खेजड़ी पेड़ों का स्थानीय समुदायों की धार्मिक और भावनात्मक आस्था से गहरा संबंध है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए 9 मार्च को एक विशेष समिति गठित कर दी है, जिसे पूरे मामले की जांच कर सुरक्षा उपायों और संभावित कानून का मसौदा तैयार करने का दायित्व दिया गया है।
Updated on:
14 May 2026 09:38 am
Published on:
14 May 2026 09:38 am
