10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

खीचन में कुरजां की सुरक्षा के लिए चार साल बाद भी नहीं लगे बर्ड डायवर्ट

  -पड़ाव स्थलों पर न विलायती बबूल का उन्मूलन, न ही लगे नए पौधे  
2 min read
Google source verification
खीचन में कुरजां की सुरक्षा के लिए चार साल बाद भी नहीं लगे बर्ड डायवर्ट

खीचन में कुरजां की सुरक्षा के लिए चार साल बाद भी नहीं लगे बर्ड डायवर्ट

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. सात समंदर पार से आने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां की सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने के लिए बर्ड डायवर्ट लगाने का काम चार साल बाद भी शुरू तक नहीं हो सका है। जिले के खींचन गांव में कुरजां के पड़ाव स्थलों पर विलायती बबूल का उन्मूलन कर नए पौधे लगाने के आदेश भी ठंडे बस्ते में है।

खींचन में कुरजां की यात्रा निर्बाध जारी रखने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय के 10 अप्रेल 2017 के आदेश की अनुपालना में राज्य सरकार की कुरजां संरक्षण विशेषज्ञ समिति ने खींचन का दौरा किया था। इसके बाद समिति ने खींचन में कंजर्वेशन रिजर्व, कुरजां के आवास एवं विचरण क्षेत्र से11 केवी तथा 33 केवी की सभी विद्युत लाइनें भूमिगत करने, विद्युत टावर शिफ्ट करने तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से निर्धारित प्रोटोटाइप के अनुसार बर्ड डाइवर्टर्स लगाने की सिफारिश की थी। साथ ही क्षेत्र से विलायती बबूल व अकेशिया टोर्टलिस का उन्मूलन कर नए पौधे व घास रोपण की सिफारिश भी की गई, लेकिन करीब चार साल बाद भी इस दिशा में काम शुरू नहीं हो पाया है।

कर देते हैं स्थान परिवर्तन
मेहमान पक्षी कुरजां का करीब छह माह की लंबी अवधि तक खींचन प्रवास न केवल पर्यटन बल्कि पक्षी शोध के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है । ये पक्षी अपने पड़ाव स्थल पर किसी भी तरह का खतरा या मौसम, भोजन की अनुकूलता न होने पर स्थान तक परिवर्तन कर देते हैं ।

इनका कहना है....

कुरजां विचरण क्षेत्र में बर्ड डाइवर्टर्स लगाने तो दूर इसके उलट हाइटेंशन इलेक्ट्रिसिटी लाइन के लिए सर्वे किया गया है । यदि सर्वेस्थल पर लाइन खींच दी गई तो पक्षियों को हरदम खतरा बना रहेगा और न्यायालय आदेशों की अवहेलना भी होगी।
-सेवाराम माली, कुरजां चुग्गाघर के सेवादार, खींचन

खींचन में बर्ड डाइवर्टर्स लगाने की जिम्मेदारी डिस्कॉम को सौंपी गई है। कंजर्वेशन क्षेत्र में विलायती बबूल का उन्मूलन कर जल्द नए पौधे लगाए जाएंगे।

-केके व्यास, सहायक वन संरक्षक, वन्यजीव मंडल, जोधपुर