10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बस-जीप में हुई भिड़ंत: जीप चालक की हुई दर्दनाक मौत, परिजनों ने रखी ये मांग

https://www.patrika.com/rajasthan-news/
2 min read
Google source verification
accident

बस-जीप में हुई भिड़ंत: जीप चालक की हुई दर्दनाक मौत, परिजनों ने रखी ये मांग

जोधपुर.

जैसलमेर रोड पर शेरगढ़ थानान्तर्गत 54 मील के पास बुधवार दोपहर पर्यटकों की मिनी बस व जीप की भिड़ंत में जीप चला रहे युवक की मौत हो गई। उसकी मासूम पुत्रियों को मुआवजे की मांग को लेकर परिजन व राजपूत समाज के लोग रात में शव को एम्बुलेंस में लेकर पावटा मानजी का हत्था स्थित मोबाइल कम्पनी के ऑफिस पहुंचे और विरोध जताया।

पुलिस के अनुसार लोहावट थानान्तर्गत देणोक गांव निवासी दिलीपसिंह (29) पुत्र छोटूसिंह राजपूत मानजी का हत्था में एक मोबाइल कम्पनी में तकनीकी कर्मचारी था। वह दोपहर में जीप में बैठकर मोबाइल टॉवर की मरम्मत करके लौट रहा था। इसी बीच 54 मील के पास जैसलमेर की तरफ जा रही पर्यटकों की मिनी बस से भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि जीप के परखच्चे उड़ गए। उसमें सवार दिलीपसिंह व बस चालक हरियाणा में करनाल निवासी पवन कुमार घायल हो गए। चार अन्य पर्यटकों के भी चोट आई। दोनों वाहनों के चालक को एम्बुलेंस की मदद से मथुरादास माथुर अस्पताल भेजा गया। वहां पहुंचते ही दिलीपसिंह को मृत घोषित कर दिया गया। शेरगढ़ थाना पुलिस ने बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया और देर शाम परिजन को सुपुर्द किया।

शव लेकर पहुंचे कम्पनी कार्यालय
मृतक के चाचा जीवराज सिंह का कहना है कि दिलीप के सात साल व पांच माह की दो पुत्रियां हैं। वह कम्पनी के कार्य से गया था। एेसे में आश्रित पुत्रियों को मुआवजा दिलाने के लिए शव को एम्बुलेंस में लेकर परिजन व समाज के लोग गांव की बजाय कम्पनी के ऑफिस पहुंचे, लेकिन तब तक संचालक व कर्मचारी ऑफिस बंद कर जा चुके थे। सिर्फ एक कर्मचारी ऑफिस के बाहर मिला। महामंदिर थानाधिकारी देवेन्द्रसिंह ने परिजन से समझाइश की।

इस दौरान मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष हनुमानसिंह खांगटा भी वहां पहुंचे। कम्पनी के संचालक को भी देर रात मौके पर बुलाया गया। परिजन मृतक की पुत्रियों के लिए दस-दस लाख रुपए की एफडीआर कराने की मांग पर अड़े रहे।

दस लाख मुआवजा, नौकरी पर बनी सहमति
दोनों पक्षों के बीच चली लम्बी बातचीत के बाद रात साढ़े 11 बजे दस लाख रुपए मुआवजा और एक जने को कम्पनी में नौकरी देने पर सहमति बनी। तब परिजन शव लेकर गांव के लिए रवाना हुए।