
माचिया जैविक उद्यान के एनक्लोजर में पेड़ के नीचे विश्राम करते टाइगर अंबिका और एंथोनी
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. मरुक्षेत्र की वनस्पति, वन्यजीव और मरु अंचल के इॅको सिस्टम से साक्षात्कार के अनूठे संगम स्थल माचिया जैविक उद्यान की आबोहवा बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों को काफी रास आई है। उम्मेद उद्यान में संचालित जंतुआलय के वन्यजीवों को शिफ्ट करने के बाद अधिकांश की सेहत व दिनचर्या और व्यवहार में भी खासा बदलाव नजर आया है। पिछले दो दशक के दौरान केट प्रजाति के वन्यजीवों के लिए उम्मेद उद्यान में संचालित जोधपुर जंतुआलय जैसे एक अभिशाप बन गया था। जंतुआलय में एक एक कर करीब एक दर्जन से अधिक आकर्षक वन्यजीव काल का ग्रास बन चुके थे। वर्ष 2011 में 21 मार्च को युवा लेपर्ड की मौत के बाद 9 सितम्बर 2011 को युवा बाघ 'रुद्र' की संदिग्ध मौत ने पूरे विभाग को झकझोर कर रख दिया था। स्टार वन्यजीव युवा बाघ 'रुद्र' की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण प्रदूषण के चलते चूहों से फैलनी वाली बीमारी लेप्टोस्पाइरोसिस बताया गया था। जंतुआलय की बाघिन 'संध्या' की दहाड़ 17 जून 2012 को थमने के बाद पूरे संभाग के दर्शक तो बाघ देखने से ही पूरी तरह वंचित हो चुके थे। लेकिन वर्ष 2016 में माचिया जैविक उद्यान का शुभारंभ कर यहां लाए गए लॉयन, लेपर्ड और टाइगर जोड़ों को प्रदूषण रहित विशाल एन्क्लोजर का वातावरण पूरी तरह रास आया। लॉयन जीएस और आरटी के जोड़े ने शावक कैलाश और रियाज को जन्म दिया जिनमें लॉयन कैलाश वर्तमान में जयपुर के नाहरगढ़ में दर्शकों के आकर्षण का केन्द्र बना है। माचिया में बिल्ली प्रजाति के सभी बड़े वन्यजीव लायन, टाइगर और लेपर्ड को केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण के मापदंड के अनुसार जोड़े के रूप में रखा गया है।
माचिया में चार साल में दो वयोवृद्ध लॉयन की मौत
वन्यजीव विशेषज्ञों ने जंगल में विचरण करने वाले लॉयन की औसत उम्र 15 वर्ष तथा जंतुआलय में 18 साल तक मानी गई है। माचिया जैविक उद्यान में 19 अक्टूबर 2016 को कोटा से लाई गई 16 वर्षीय शेरनी 'गौरी' को जोड़ा 17 वर्षीय लॉयन 'लव' के साथ बनाया गया लेकिन दिसम्बर 2017 में लॉयन 'लव' की मौत हो गई थी। उसके कुछ समय बाद 1 सितम्बर 2919 को 19 वर्षीय वृद्ध शेरनी 'गौरी' की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी।
Published on:
03 Oct 2020 09:28 pm
