
MILLET--कोरोना से अटका बाजरा का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
जोधपुर।
वैश्विक कोरोना महामारी की वजह से लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हुए है। इनमें शोध-अनुसंधान से जुड़े सेंटर, कार्य भी प्रभावित हुए है। कोरोना की वजह से ही जोधपुर में प्रस्तावित बाजरा का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नहीं खुल पाया। केन्द्रीय कषि मंत्रालय ने बाजरा की सर्वाधिक उत्पादकता को देखते हुए जोधपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का निर्णय लिया था, कोरोना की वजह से इस सेंटर के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कृषि विश्वविद्यालय में प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बाजरा के विभिन्न उत्पादों से मूल्य संवर्धन के लिए छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने व बाजरा उत्पादों के माध्यम से नए उद्यमियों को जोडऩे की योजना थी। उल्लेखनीय है कि देश में खाद्य व पोषण संबंधी सुरक्षा में योगदान देने की बहुत अधिक क्षमता को देखते हुए वर्ष 2018 में बाजरा को राष्ट्रीय अनाज घोषित किया है।
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सीड हब भी जोधपुर में
राजस्थान में बाजरा के सर्वाधिक उत्पादन को देखते हुए जोधपुर में बाजरा के दो सीड हब भी है। सीड हब में बाजरा की विभिन्न किस्मों, उनकी गुणवत्ता सुधार, उन्नत बीज उत्पादन व वितरण का काम चल रहा है। सीड हब मण्डोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना केन्द्र के अधीन संचालित हो रहे है। पूरे देश में बाजरे का करीब 70-90 लाख हैक्टेयर क्षेत्र है। इनमें सर्वाधिक बाजरा राजस्थान में करीब 50 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में होता है।
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विभिन्न बीमारियों में कारगर
हाल ही में हुए विभिन्न अनुसंधानों में बाजरा में पोषण संबंधी विशेषताएं अन्य अनाजों की तुलना में अधिक पाइ गई। बाजरा की नई संकर किस्मों में आयरन व जिंक तत्वों की अधिकता पाई गई। जो कुपोषण को समाप्त करने में कारगर होगा। अनुसंधानों के निष्कर्षो के अनुसार, बाजरा में पोस्ट प्रेंडियल ब्लड ग्लूकोज लेवल व ग्लाइकेसिलेटेड हेमोग्लोबिन कम पाया जाता है। जो भारत में तेजी से बढ़ती जा रही मधुमेह बीमारी के निदान में मुख्य भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, बाजरा ब्लड प्रेशर आदि बीमारियों के निदान में भी कारगर सिद्ध होगा।
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बाजरा के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय को फरवरी में प्रोजेक्ट को अपडेट कर सब्मिट कर दिया था। कोरोना की वजह से इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति पर निर्णय नहीं लिया गया। अब प्रोजेक्ट के जल्द ही स्वीकृत होने की उम्मीद है।
निशा चौधरी, को-प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर
बाजरा ऑफ एक्सीलेंस प्रोजेक्ट
Published on:
13 Jan 2021 07:30 pm
