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जोधपुर में मिला कावासाकी का मरीज, एक लाख में से 67 बच्चों में होती है यह बीमारी

कावासाकी बच्चों में होने वाली ऐसी बीमारी है, जिसका कारण अब तक पता नहीं चला है।
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गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. शहर के एक निजी अस्पताल में पिछले महीने कावासाकी बीमारी से पीडि़त बच्चा पहुंचा। लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों ने बीमारी की पहचान कर उपचार किया। सात दिन अस्पताल में रहने के बाद बच्चे का बुखार खत्म होने के बाद उसे छुट्टी दी गई। गोयल अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी अग्रवाल के अनुसार बाड़मेर निवासी दीपेश (5) को अक्टूबर की शुरुआत में अस्पताल लाया गया था। एक महीने से उसका बुखार नहीं टूट रहा था। उसकी आंखें लाल होने के साथ गले में गांठ हो गई और अंगुलियों की त्वचा उतरने लगी थी। श्वेत रक्त कणिकाएं बढकऱ 20 हजार तक पहुंच गई। ईको करने पर कोरोनरी आर्टरी पर सूजन दिखाई दी। डॉ. अग्रवाल ने लक्षण के आधार पर इसे कावासाकी मानकार इम्यूनोग्लोब्यूलिन के इंजेक्शन लगाए। एक सप्ताह में बुखार टूट गया और ह्रदय की सूजन भी कम हो गई। दीपेश अब स्वस्थ है।

क्या है कावासाकी
कावासाकी बच्चों में होने वाली ऐसी बीमारी है, जिसका कारण अब तक पता नहीं चला है। डॉक्टर इसे इम्यूनोलॉजिकल डिसऑर्डर मानते हैं। इसमें लम्बे समय तक बुखार नहीं उतरता और गले में संक्रमण होने के साथ त्वचा उतरने लगती है। ह्रदय को रक्त आपूर्ति करने वाली कोरोनरी आर्टरी में थक्का जमने के साथ सूजन आ जाती है। डॉक्टर इसकी पहचान लक्षण के आधार पर करते हैं। जापान में बच्चों के डॉक्टर टॉमीसाकु कावासाकी ने सन्1967 में इसकी खोज की थी। उनके नाम पर इस बीमारी का नाम कावासाकी रखा गया। यह बीमारी संक्रामक बीमारी नहीं है। समय पर इलाज नहीं होने पर कोरोनरी आर्टरी के फटने पर हार्ट अटैक आ सकता है।

मैंने जीवन में 10-12 मामले देखे
अस्पताल में कभी-कभार ऐसे लक्षण वाला मरीज आता है। मैंने अब तक कावासाकी से ग्रस्त 10-12 बच्चों का इलाज किया है।

डॉ. प्रमोद शर्मा, शिशु रोग विभागाध्यक्ष, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

10 साल में 2 मरीज देखे
मैंने दस साल में जोधपुर में कावासाकी के दो मरीजों का इलाज किया है। गांवों में बुखार नहीं उतरने पर मरीजों को डॉक्टर स्टीरॉयड के इंजेक्शन देकर बीमारी को छिपा देते हैं, लेकिन शरीर के अंदर यह बीमारी हार्ट को डैमेज करती रहती है। डॉक्टरों को भी इस मामले में जागरूक होने की जरूरत है।

डॉ. जेपी अग्रवाल, शिशु रोग विशेषज्ञ, गोयल अस्पताल