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बच्चों के अंतरजातीय विवाह का दंश : माता-पिता समाज से बहिष्कृत

- सेवानिवृत्त वृद्ध कर्मचारी सामाजिक स्तर पर प्रताड़ना- न्याय के लिए लगा रहा गुहार, पुलिस कमिश्नर व डीसीपी को परिवाद देने के बावजूद एफआइआर दर्ज नहीं
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बच्चों के अंतरजातीय विवाह का दंश : माता-पिता समाज से बहिष्कृत

बच्चों के अंतरजातीय विवाह का दंश : माता-पिता समाज से बहिष्कृत

जोधपुर।
12वीं पाल रोड के पास रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी ने पुत्र व पुत्री को अच्छी शिक्षा दिलाई। दोनों ने अंतरजातीय विवाह किए, लेकिन समाज के कुछ लोगों को यह नागवार गुजरी। उन्होंने पहले तो 51 हजार रुपए व 31 हजार रुपए जुर्माना वसूला और फिर माता-पिता को समाज से कथित रूप से बहिष्कृत भी कर दिया। पीडि़त वृद्ध ने पुलिस कमिश्नर और पुलिस उपायुक्त पश्चिम को परिवाद देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस स्टेशन देवनगर अभी तक एफआइआर दर्ज नहीं की गई है।
12वीं पाल रोड पर सेक्टर बी निवासी हीरालाल भाटी उर्फ पेंटर बाबू (65) ने बताया कि उनके दो पुत्र व एक पुत्री हैं। एक पुत्र व पुत्री ने मर्जी से सवर्ण जातियों में अंतरजातीय विवाह किए। पुत्री वर्तमान में परिवार सहित बोस्टन में रह रही है। वर्ष 2009 में पुत्र के अंतरजातीय विवाह करने पर समाज ने समाज की मर्यादा का हवाला देकर 51 हजार रुपए बतौर जुर्माना वसूले थे।
वर्ष 2017 में पुत्री ने अंतरजातीय विवाह किया तब भी समाज के पंचों ने 31 हजार रुपए जुर्माना वसूला था। इसके बाद भी समाज के कथित पंच वसूली के लिए दबाव डालते रहे, लेकिन वृद्ध ने देने में असमर्थता जता दी थी। परेशान होकर वृद्ध ने 30 दिसम्बर 2021 को समाज के एक पंच से वसूली के रुपए जमा होने वाले बैंक खाते की सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी।
इससे व्यथित होकर समाज के पंच गत 30 जनवरी को मसूरिया में समाज के छात्रावास में एकत्रित हुए थे और वृद्ध की गैर मौजूदगी में समाज से बहिष्कृत करने का फरमान जारी कर दिया था। फिर 3 फरवरी को बैंक खाते की जानकारी दी गई थी।
शादी व सामाजिक आयोजन में जाने पर रोक
समाज से बहिष्कृत करने के कारण समाज में होने वाले शादी समारोह और सामाजिक कार्यक्रमों से उसे व पत्नी को अलग किया जाने लगा। गत दिनों समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के पौत्र की शादी में वृद्ध व पत्नी को निमंत्रण नहीं दिया गया।
शिक्षित परिवार जातिवाद का दंश झेल रहा
पीडि़त हीरालाल भाटी का परिवार उच्च शिक्षा प्राप्त है। इसके बावजूद वृद्ध दम्पती जातिवाद का दंश झेल को विवश हैं। वृद्ध का कहना है कि वो खुद सरकारी कर्मचारी रह चुके हैं। उनके दो पुत्र व एक पुत्री है। एक पुत्र सीए तो दूसरा पुत्र एसबीआइ में अधिकारी है। पुत्री ने नासिक से एमबीए किया है । एसबीआइ अधिकारी पुत्र व पुत्री ने अंतरजातीय विवाह किए हैं। पुत्री पांच साल से बोस्टन में रह रही है।
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'कुछ समय पहले थाने में शिकायत आई थी। जांच व बयानों में पंचों ने समाज से बहिष्कृत करने के आरोपों से इनकार किया था। अब पीडि़त ने पुलिस कमिश्नर ऑफिस में एक और परिवाद दिया है। जो अभी तक मुझे मिला नहीं है। परिवाद की दुबारा विस्तृत जांच कराई जाएगी।'
प्रेम धणदे, सहायक पुलिस आयुक्त (प्रतापनगर) जोधपुर।