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मंडोर/जोधपुर. जोधपुर को पत्थरों का शहर कहा जाता है और यहां से निकलने वाला छीतर का पत्थर या सैण्ड स्टोन अपनी एक अलग ही पहचान लिए हुए है। वर्षो से, जोधपुर में छीतर का पत्थर निकल रहा है, लेकिन जोधपुर के छीतर के पत्थर को राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली जोधपुर स्टोन पार्क से। मण्डोर नौ मील स्थित जोधपुर स्टोन पार्क से व्यवस्थित तरीके से पत्थर का निकालकर, पत्थर की कटिंग, डिजाइनिंग, फीनिशिंग आदि की जा रही है। जो देश-विदेश में जोधपुर की शान बढ़ा रहा है।
हर तरह का सेण्ड स्टोनस्टोन पार्क
जोधपुर में सेण्ड स्टोन कटिंग युनिटों का सरकार द्वारा अनुमोदित एकमात्र क्षेत्र है। यहां हर तरह का स्टोन निकलता है, जिसमें छीतर, भूरा, सफेद, लाल, गुलाबी धारीदार, मल्टीकलर, थार जेब्रा, टीक वुड, गोल्डन टीक, पीला पत्थर निकलता है।
प्रतिदिन १ लाख स्क्वायर फुट पत्थर
स्टोन पार्क की विभिन्न स्टोन कटिंग इकाइयों से प्रतिदिन करीब १ लाख स्क्वायर फुट पत्थर निकलता है। जिनसे टाइल्स, स्लेब्स, ब्लॉक्स, वॉल टाइल्स, हैण्डीक्राफ्ट उत्पाद, सेण्ड गेट, खिड़कियां, खम्भे, टेबल, स्टूल, बेंच, फव्वारें, स्टोन गिफ्ट आयटम्स आदि को कटिंग कर डिजाइन व फिनीशिंग की जाती है।
५० स्टोन आधारित इकाइयां
रीको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक विनीत गुप्ता के अनुसार, रीको की ओर से वर्ष २००३ में स्टोन पार्क औद्योगिक क्षेत्र के लिए ५० एकड निजी भूमि अवाप्त की गइ्र्र। यहां आधारभूत सुविधाएं विकसित कर अक्टूबर २००६ में इस औद्योगिक क्षेत्र को स्टोन प्रोसेसिंग औद्योगिक इकाइयों के लिए विकसित किया गया था। इसमे ७७ प्लॉट नियोजित किए गए थे, जो सभी को आवंटन किया जा चुके है। वर्तमान में ५० स्टोन आधारित इकाइयां लगी हुई है।
विदेशों में निर्यात होता है
जोधपुर के छीतर का पत्थर न केवल देश बल्कि विदेशों की भी शान बन रहा है। यहां से अमरीका, ओमान, दुबई, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, अरब देशों में बड़ी मात्रा में पत्थर निर्यात किया जा रहा है। साथ ही, देश में गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब व दक्षिण भारतीय राज्यों में बड़ी मांग है। प्रदेश का विधानसभा भवन, दिल्ली-अहमदाबाद के अक्षरधाम मंदिर , जोधपुर का एम्स , आईआईटी, न्यू हाईकोर्ट आदि विख्यात भवनों के निर्माण में जोधपुर का छीतर काम में लिया गया है।
संजय पुरोहित, सैण्ड स्टोन व्यापारी
उच्च तकनीकी वाली अत्याधुनिक मशीनें
स्टोन पार्क में पत्थर निकालने, काटने, फिनीशिंग, डिजायनिंग आदि के लिए उच्च तकनीकी वाली अत्याधुनिक मशीनें और प्लांट्स लगे हुए है। जहां विश्वस्तरीय काम हो रहा है। स्टोन पार्क में गेंग शॉ प्लांट, कटर प्लांट, पॉलिशिंग मशीन, एज् कटिंग मशीनें आदि लगी है। इसके अलावा शॉर्ट ब्लास्ट मशीनें, सीएनसी कम्प्यूटराइज्ड मशीनें लगी हुई है।
विपिन टांक, सैण्ड स्टोन व्यापारी
विश्वविख्यात है जोधपुर का छीतर पत्थर
छीतर पत्थर इतिहास का साक्षी रहा है। मेहरानगढ़, उम्मेद भवन पैलेस, सरदार राजकीय संग्रहालय सहित जोधपुर की एेतिहासिक इमारतों में छीतर का पत्थर प्रयुक्त किया गया है। करीब ५५९ साल पुराने मेहरानगढ़ में प्रयुक्त छीतर के पत्थर आज भी अपना वजूद बनाए हुए है। वर्तमान में राजस्थान उच्च न्यायालय और एम्स के विशाल भवन में भी पूरी तरह छीतर पत्थर प्रयुक्त किया गया है। वर्ष १९३० में उम्मेद भवन निर्माण के समय सूरसागर क्षेत्र की पत्थरों की खानों से छीतर पत्थर को उम्मेद भवन तक लाने के लिए विशेष तौर पर रेलवे लाइन बिछाई गई थी। छीतर पत्थर से तैयार विश्वविख्यात उम्मेद भवन पैलेस विश्व के १०० सुंदरतम महलों की सूची में शामिल किया गया है। विदेशों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में भी लगातार छीतर पत्थर की मांग बढऩे के बाद छीतर की टाइल्स भी बनने लगी है।
Published on:
16 Jan 2018 12:48 pm
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