10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

महात्मा गांधी अस्पताल : क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस का संभाग के सरकारी अस्पताल में पहला ऑपरेशन

महात्मा गांधी अस्पताल में गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने अग्नाशय के गम्भीर रोग क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस के ऑपरेशन में सफलता प्राप्त की है।
2 min read
Google source verification
महात्मा गांधी अस्पताल : क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस का संभाग के सरकारी अस्पताल में पहला ऑपरेशन

महात्मा गांधी अस्पताल : क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस का संभाग के सरकारी अस्पताल में पहला ऑपरेशन

जोधपुर. महात्मा गांधी अस्पताल में गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने अग्नाशय के गम्भीर रोग क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस के ऑपरेशन में सफलता प्राप्त की है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इस तरह का ऑपरेशन जोधपुर संभाग के सरकारी अस्पताल में पहली बार हुआ है। ऑपरेशन पांच घंटे चला।

गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार चौधरी ने बताया कि यह मरीज़ पिछले 12 साल से इस रोग से पीड़ित है। इस रोग में पेट में लगातार असहनीय तेज दर्द होता था। मरीज को शुगर भी हो गया था। उन्होंने बताया कि पेंक्रियाज की ग्रंथी के पास खून की नलियां होने एवं बार बार इन्फ्लमेशन होने से अत्यधिक रक्त स्राव की आशंका रहती है। सूक्ष्म विच्छेदन करके पेंक्रियाज की नली को पूरी तरह खोल कर अंदर की पथरी निकाली गई। पेंक्रियाटीक हेड को कोर किया गया। आंत से रू-एन-वाई लूप बनाया गया। फिर उसे पेंक्रियाज की नली से जोड़ा गया। इसके बाद छोटी आंत को वापस छोटी आंत से जोड़ा गया। इस विधि को ‘फ्रेज प्रोसिजर’ कहा जाता है।

क्या है क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस

इस रोग के मरीजों में इंसुलिन व खाना पचाने का एंजाइम बनाने वाली अग्नाशय (पेंक्रियाज) ग्रंथी की नली में रुकावट से ग्रंथी स्वत: नष्ट होने लगती है। रक्त में इंसुलिन की कमी से शुगर हो जाता है। खाना नहीं पचने से वजन कम होने लगता है। साथ ही साथ अत्यधिक दर्द की शिकायत रहती है। लम्बे समय तक रुकावट रहने से पेंक्रियाज में पथरी बनने लगती है, तब इसे क्रोनिक कैल्सिफिक पेंक्रियाटाइटिस कहते हैं।

क्या है इलाज

शुरुआती अवस्था में दवाई से इलाज करते हैं। अगर आराम नहीं मिलता तो पेंक्रियाज की नली में एंडोस्कोपिक स्टेंट डाला जाता है। दोनों विकल्प असफल होने पर ऑपरेशन किया जाता है।

ऑपरेशन टीम

डॉ. दिनेश कुमार चौधरी, डॉ. शुभम, डॉ.सरिता जनवेजा, डॉ. वन्दना शर्मा तथा डॉ. चेतन। नर्सिंग ऑफिसर सीमा एवं नगाराम।