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उम्मेद उद्यान स्थित म्यूजियम का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री ने दिए कई निर्देश
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उम्मेद उद्यान स्थित म्यूजियम का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री ने दिए कई निर्देश

मुख्यमंत्री अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से भी की मुलाकात, सकारात्मक फैसले की उम्मीद
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उम्मेद उद्यान स्थित म्यूजियम का निरीक्षण
जोधपुर. जोधपुर में अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री से मिलने वालों का तांता लगा रहा। सुबह होटल अजीत भवन के बाहर राजकीय माध्यमिक विद्यालय महलों की ढाणी झालामंड को क्रमोन्नत करने की मांग को लेकर छात्राओं ने धरना दिया। होटल के बाहर पुलिस जाप्ता तैनात होने के कारण यहां रुकने वाले सैलानियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान पिछले 32 दिनों से उदयपुर में हाईकोर्ट की सर्किट ब्रांच के विरोध में आंदोलनरत अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ वकीलों के दोनों संगठनों के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों के साथ सकारात्मक वार्ता हुई है। प्रतिनिधि मंडल में शामिल उपाध्यक्ष कपिल बोहरा ने बताया कि उदयपुर में हाईकोर्ट की सर्किट बैंच बनाने के लिए बनी समिति पर चर्चा की गई है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि जोधपुर की शान से कोई समझोता नहीं किया जाएगा। इस वार्ता के बाद आंदोलन पर विराम लगने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री उम्मेद उद्यान स्थित म्यूजियम का निरीक्षण करने पहुंची मुख्यमंत्री ने म्यूजियम के मॉडल का बारिकी से समझा व सुधार के लिए सुझाव भी दिए। मुख्यमंत्री के साथ केन्द्रीय राज्य मंत्री पीपी चौधरी, केन्द्रीय राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, वन मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया, महापौर घनश्याम ओझा सहित पार्टी के कई नेता उपस्थित थे।

 

म्यूजियम की रोचक जानकारी

लॉर्ड किचनर के जोधपुर आने पर हुआ था निर्माण

अतीत के झरोखे बताते हैं कि पब्लिक पार्क के सरदार म्यूजियम की लॉर्ड किचनर के जोधपुर आने पर सन 1909 में आयोजित मारवाड़ शिल्प कला प्रदर्शनी के समय स्थापना हुई थी। यह संग्रहालय भी पहले सोजती गेट के बाहर था। वहां से पहले राई का बाग स्थित एक इमारत में और बाद में सूरसागर ले जाया गया था। कालांतर में भारत सरकार ने 1916 में इसे मान्यता दी। यह संग्रहालय सन 1921 में दरबार स्कूल भवन और 1936 में पब्लिक पार्क स्थित इमारत में शिफ्ट किया गया था। इस म्यूजियम को जुलाई-अगस्त 2017 में तब नई जिंदगी मिल गई, जब इसे सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी की इमारत भी मिल गई और इस इमारत को नायाब वस्तुएं रखने के लिए अच्छी जगह मिल गई।

 

सातवीं और आठवीं सदी की अद्वितीय चीजें
अब यह एक बड़ा राजकीय संग्रहालय है। खासियत यह है कि इस म्यूजियम में मारवाड़ की प्राचीन राजधानी मंडोर के उपवन की खुदाई के समय भूगर्भ से मिली सातवीं और आठवीं शताब्दी की गोलाकार चांदी की 30 छोटी छोटी मुद्राएं भी सुरक्षित हैं। इसमें 650 से 1100 ईस्वीं तक के सिक्के सुरक्षित हैं। म्यूजियम के कलक्शन में सांभर के नमक से निर्मित सौ बरस पुराने सुराही, कप, प्लेट,कटोरे, जाम व गिलास आदि भी दर्शनीय हैं।