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पुण्य कमाने की राह में रोड़ा बन सकता है कोरोना

अश्विन मास में होगी भोगिशैल परिक्रमा, मारवाड़-गोड़वाड़ के हजारों श्रद्धालु भी होते है शामिल
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पुण्य कमाने की राह में रोड़ा बन सकता है कोरोना

पुण्य कमाने की राह में रोड़ा बन सकता है कोरोना

जोधपुर. जोधाणा की सांस्कृतिक परम्परा और आस्था का महाअनुष्ठान भोगिशैल परिक्रमा इस बार अश्विन मास में 26 सितम्बर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को विसर्जित होगी। अयोध्या की 24 कोसी और ब्रज की गोवद्र्धन परिक्रमा की तरह प्रत्येक तीसरे वर्ष पुरुषोत्तम मास (ईदक मास) के उपलक्ष में सात दिवसीय आस्था के सफर में जोधपुर शहर सहित मारवाड़, गोड़वाड़ और मेवाड़ अंचल से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते है। लेकिन इस बार कोरोनाकाल के चलते सरकार और प्रशासन की गाइड लाइन हजारों भक्तों के पुण्य कमाने की राह में रोड़ा बन सकती है। हालांकि हिन्दू सेवा मंडल ने यात्रा की परम्परा जारी रखने की घोषणा कर दी है। हिन्दू सेवा मंडल के बैनर तले आस्था के सफर के दौरान श्रद्धालु जोधपुर शहर के चारों तरफ करीब सौ से अधिक किमी की पद यात्रा करते हुए प्राचीन धार्मिक स्थलो में सत्संग तथा प्राचीन जलकुण्डों में स्नान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते है। आस्था के सफर के दौरान रातानाडा, चौपासनी, बड़ली, बैजनाथ, बेरीगंगा, मंडोर प्रमुख पड़ाव स्थल होते है।

क्या है भोगिशैल परिक्रमा

भोगि का अर्थ नाग और शैल का अर्थ पर्वत होता है। जोधपुर के 100 किमी दायरे में स्थित नाग पहाडिय़ों के धार्मिक स्थलों की परिक्रमा भक्ति आराधना का अनुपम अवसर माना जाता है। कंटीली झाडिय़ों, प्राकृतिक झरनों, दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर प्रकृति की गोद में स्थित धार्मिक स्थलों की पदयात्रा आध्यात्मिक लाभ के साथ रोमांचक अनुभवों से परिपूर्ण होती है।

यह भी परेशानी

बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से परिक्रमा पथ की सड़के समयबद्ध तरीके से प्राथमिकता के आधार पर दुरूस्त नहीं होने और ठहराव स्थलों पर समूचित प्रबंध के अभाव में श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है।

पूर्व में कब-कब हुई यात्रा

23 अप्रेल से 29 अप्रैल 2010

26 अगस्त से 01 सितम्बर 2012

27 जून से 03 जुलाई 2015

24 मई से 30 मई 2018

नहीं टूटने देंगे परम्परा, लेकिन प्रशासनिक गाइडलाइन की पालना होगी

परिक्रमा यात्रा की तैयारियां हर बार पांच माह पूर्व शुरू हो जाती है परन्तु इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण विलंब हो रहा है। भोगीशैल परिक्रमा यात्रा की परम्परा हर सूरत में कायम रखी जाएगी। किसी भी स्थिति में यह परम्परा नही टुटने देंगे लेकिन सरकार की गाइड लाइन व प्रशासनिक दिशा निर्देशों को सर्वोपरी रखा जाएगा । आयोजन समिति प्रशासन की स्वीकृति के बाद व्यवस्थाओं को अन्तिम रूप देने में जुट गई है।

-विष्णुचन्द्र प्रजापत सचिव भोगीशैल परिक्रमा यात्रा 2020