जोधपुर की सब्जी मंडियों पर मंडरा रहा है कोरोनावायरस का खतरा, सोशल डिस्टेंसिंग भी यहां हो रही है फेल

पावटा स्थित सब्जी मंडी में लोग संक्रमण का वाहक बन सकते हैं। सब्जी मंडी में हर सुबह 6 से 9 बजे तक तीन घण्टे तक एक ही समय में 250 से 500 व्यक्ति खड़े रहते हैं। कई लोगों के मध्य तो एक इंच की दूरी भी नहीं रहती। थोक विक्रेता, रिटेलर, ठेला चालकों के अलावा शहरवासियों की भीड़ यहां नजर आती है।

वीडियो : ओम बडग़ुर्जर/जोधपुर. पावटा स्थित सब्जी मंडी में लोग संक्रमण का वाहक बन सकते हैं। सब्जी मंडी में हर सुबह 6 से 9 बजे तक तीन घण्टे तक एक ही समय में 250 से 500 व्यक्ति खड़े रहते हैं। कई लोगों के मध्य तो एक इंच की दूरी भी नहीं रहती। थोक विक्रेता, रिटेलर, ठेला चालकों के अलावा शहरवासियों की भीड़ यहां नजर आती है। कुछ के मुंह पर मास्क होता है तो कुछ वैसे ही एक दूसरे के मुंह में मुंह डालकर भाव-ताव करते नजर आते हैं।

यही हाल घण्टाघर स्थित सब्जी मंडी का भी है। यहां भी ठेला चालकों के इर्द-गिर्द लोगों का हुजूम उमड़ा रहता है। रातानाडा स्थित सब्जी मंडी और सिवांची गेट स्थित सब्जी मंडी में भी ऐसे नजारे आम हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अभी तक एक दूसरे से दूरी बनाए रखना यानी सोशियल डिस्टेंसिंग ही अचूक अस्त्र है लेकिन सब्जी मंडी में लोग इसकी परवाह किए बगैर एक दूसरे से सटे हुए खड़े रहते हैं। यह जरुर है कि लोग जल्दी-जल्दी अपना काम खत्म करने में लगे रहते हैं लेकिन एक दूसरे के सम्पर्क में आने की उन्हें कोई परवाह नहीं है।

बाजार में फल की कमी
सब्जियां जोधपुर के आसपास के गांवों से आसानी से मंडी तक आ जाती है लेकिन फल गायब है। पुलिस द्वारा सभी तरह के वाहनों को रोके जाने की वजह से कुछ दिन से शहर में फल की गाड़ी बहुत कम आ रही है। आम तो देखने को भी नहीं मिल रहा है। सेव भी बहुत कम दिखाई दे रही है। चीकू, संतरा की क्वालिटी अच्छी नहीं है। केले व पपीता फिलहाल ठेले पर देखें जा सकते हैं।

पुलिस नहीं इसलिए सुबह अधिक भीड़
सुबह-सुबह पुलिसकर्मी ड्यूटी पर नहीं रहते हैं। इस कारण शहरवासियों की अधिक भीड़ रहती है हालांकि वे सब्जी खरीदने, दूध लेने, दवाई लेने जैसे जरुरी कार्यों के लिए ही निकलते हैं लेकिन इस दौरान उनके द्वारा सोशियल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करना गंभीर खतरा हो सकता है। सुबह 10 बजे बाद पुलिस की सख्ती शुरू हो जाती है। कई बार यह सख्ती इतनी गैर जरुरी होती है कि लोग सुबह-सुबह ही अपना काम खत्म कर घर में आना पसंद करते हैं।

सुबह भीड़ होने का एक कारण यह भी है कि दस बजे के बाद सब्जी, किराणा, आटा की कई दुकानें बंद हो जाती है। पुलिस भी लॉकडाऊन से बाहर रखी गई जरूरत की दुकानों को जबरदस्ती बंद करवा देती है। इस परेशानी से बचने के लिए भी लोगों की सुबह अधिक भीड़ रहती है। यदि दोपहर तक भी जरुरत की दुकानें खुली रहे तो लोग आवश्यकतानुसार ही सामान लेने आएंगे।

मास्क पहनने से क्या होगा?
डेयरी व मेडिकल स्टोर पर कई लोग मास्क पहनकर कतार में खड़े अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं। केवल मास्क पहनने से संक्रमण से नहीं बचा जा सकता है। इसके लिए एक दूसरे से न्यूनतम एक मीटर की दूरी आवश्यक है।

दवाई की अधिकांश दुकानें बंद
महात्मा गांधी अस्पताल के सामने स्थित मेडिकल मार्केट में गुरुवार सुबह 8 बजे तक दवाइयों की केवल दो दुकानें खुली हुई थी। दवाई नहीं मिलने से लोग परेशान होकर जा रहे थे। पूछने पर बताया गया कि संक्रमण के डर से अधिकांश दुकानें बंद रहती हैं। यहां तक की बड़े मेडिकल स्टोर भी नहीं खुल रहे हैं। बीपी, डायबिटीज, हार्ट, किडनी जैसे मरीजों को प्रतिदिन दवाई खानी पड़ती है। ये मरीज अपने स्टॉक को लेकर खासे परेशान है।

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Harshwardhan bhati Desk
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