
RTO--दो साल बाद भी नहीं लग पाए 'सेंसरÓ
जोधपुर।
परिवहन विभाग में बनाया गया नया ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेक दो साल बाद भी मूर्तरूप नहीं ले पाया है। वाहनों के लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेक की इस नई प्रणाली से ट्रायल लेने के लिए तैयार ट्रेक पर सेंसर, कम्प्यूटर सिस्टम, सॉफ्टवेयर सहित तकनीकी काम अटक गए है। नतीजतन, लोगों को अपने वाहनों के लाइसेंस के लिए कतारों में लगकर ही ट्रायल देनी पड़ रही है और परिणामों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ट्रेक का निर्माण राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (आरएसआरडीसी ) ने किया है। पारदर्शिता से ट्रायल कराने के लिए तकनीकी प्रक्रिया के तहत ऑटोमेटेड ड्राइविंग टे्रक पर ट्रायल के बाद परिणाम व अन्य तकनीकी कार्य कम्प्यूटर के माध्यम से होंगे। ट्रायल परिवहन निरीक्षक द्वारा नहीं बल्कि कम्प्यूटर से लिया जाएगा। ऐसे में ट्रायल के दौरान नियमों की पालना करने पर ही लर्निंग लाइसेंस मिल पाएगा।
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कैमरों से मॉनिटरिंग
विभाग की ओर से लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस में आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन करने के बाद ड्राइविंग ट्रायल लेने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। ट्रेक पर कैमरों से मॉनीटरिंग की जाएगी और टेस्ट के बाद आवेदक के पास-फेल का रिजल्ट निकाला जाएगा।
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यह होगा नई प्रक्रिया में
- 45 मिनट पहले पहुंचना होगा आरटीओ कार्यालय।
- 20 मिनट की क्लास होगी ट्रायल से पहले।
- 02 ड्राइविंग ट्रेक बनाए गए है ।
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4 प्रकार के टेस्ट होंगे
- पहले टेस्ट में यातायात नियमों की पालना करते हुए 8 का अंक बनाना जरूरी होगा
- दूसरे टेस्ट में अंग्रेजी के एच अक्षर की तरह गाड़ी चलानी पडेगी
- तीसरे टेस्ट में गाड़ी पार्क करके दिखानी होगी
- चौथे टेस्ट में गाड़ी चढ़ाते समय पीछे नहीं खिसकनी चाहिए।
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ट्रेक का सिविल कार्य पूरा हो चुका है। ट्रेक पर मैन्युल ट्रायल तो लिया ही जा रहा है। अब सेंसर लगाने सहित कुछ तकनीकी काम बाकी है, जिसके लिए मुख्यालय स्तर से वर्क ऑर्डर होने पर ही काम होगा।
रामनारायण गुर्जर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी
जोधपुर
Published on:
24 Nov 2020 04:37 pm
