
Sucide Toilet,Sucide Toilet,Sucide,Sucide,प्यार में परिवार बना बाधा तो प्रेमी युगल ने खाया जहर, आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच चल रहा संघर्ष,प्यार में परिवार बना बाधा तो प्रेमी युगल ने खाया जहर, आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच चल रहा संघर्ष,जोधपुर में नकबजनों-वाहन चोरों के हौसले के आगे जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस का सरेंडर, आमजन चिंतित
विकास चौधरी/जोधपुर. पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में चोर व लुटेरे बेधडक़ वारदात पर वारदात किए जा रहे हैं। साल-दर-साल नकबजनी, वाहन चोरी की वारदातें बढ़ती जा रही हैं। कमिश्नरेट के आंकड़ों को देखने से लगता है कि चोर और नकबजन तो अपना टारगेट बढ़ाते जा रहे हैं और पुलिस वारदातों का पर्दाफाश करने और माल बरामदगी में पिछड़ती जा रही है। पिछले वर्ष हुई नकबजनी की वारदातों में से आधे से अधिक का खुलासा नहीं हो पाया और पुलिस ने हथियार डालते हुए एफआर लगा दी।
नतीजा यह कि लोगों में घर या दुकानों में रखे माल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।कमिश्नरेट के पश्चिमी जिले में जनवरी से दिसम्बर 2019 तक 188 व पूर्वी जिले में जनवरी से अक्टूबर तक 145 (कुल 333) नकबजनी दर्ज की गई। इनमें से 202 वारदातों का खुलासा तक नहीं हो पाया। पश्चिमी जिले में 134 व पूर्वी जिले में 68 (कुल 202) मामलों में अदम पता एफआर लगा दी गई।
पुलिस कमिश्नरेट से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में 13 करोड़ दस लाख रुपए के माल की चोरी और लुटेरों ने 75.15 लाख रुपए का सामान लूटा था। लेकिन पुलिस चोर व लूट गिरोहों को सींखचों तक पहुंचाने में खासी विफल रही। गत वर्ष चोरों से 7.25 करोड़ रुपए और लुटेरों से 58.76 लाख रुपए का सामान ही बरामद हो सका है। बरामदगी का यह आंकड़ा चार पहिया वाहन चोरों के पकड़ में आने से संतोषजनक स्थिति में आया है। वरना मकान-दुकानों में चोरों (नकबजनों) से बरामदगी सिर्फ 29.39 प्रतिशत रही।
नकबनजी बढ़ी, दुपहिया वाहन चोरियां भी दोगुनी
पुलिस कमिश्नरेट के पश्चिमी जिले में जनवरी 2019 से दिसम्बर तक 188 नकबजनी हुईं। वर्ष 2018 में 174 व वर्ष 2017 में 163 वारदातें हुईं थी। वहीं, पूर्वी जिले में जनवरी 2019 से अक्टूबर तक 145 नकबजनी हुईं थी। वर्ष 2018 में 98 व 2017 में 104 वारदातें हुईं थी। पश्चिमी जिले में जनवरी-दिसम्बर 2019 तक 83, 2018 में 64 व 2017 में 87 चार पहिया वाहन चोरी हुए थे। पूर्वी जिले में जनवरी-अक्टूबर 2019 तक 32, 2018 में 28 व 2017 में 39 चार पहिया वाहन चोरियां हुईं थी। दुपहिया वाहन चोरियों का आंकड़ा सर्वाधिक चिंताजनक रहा। पश्चिमी जिले में गत वर्ष 801, वर्ष 2018 में 481 व वर्ष 380 दुपहिया वाहन चोरी हुए। पूर्वी जिले में जनवरी-अक्टूबर 2019 तक 485, वर्ष 2018 में 295 व वर्ष 2017 में 249 दुपहिया वाहन चोरी हुए थे।
वाहन चोर गिरोहों ने भी बताया पुलिस को ठेंगा
कमिश्नरेट के पश्चिमी जिले में वर्ष 2019 में दुपहिया वाहन चोरी के 801 और पूर्वी जिले में जनवरी-अक्टूबर तक 485 मामले दर्ज किए गए थे। पश्चिमी जिले की पुलिस 694 व पूर्वी जिले की पुलिस 361 मामलों में अदम पता एफआर लगा चुकी है। यानि पुलिस दुपहिया वाहनों चोरों को पकडऩे में नाकाम रही है।
वारदातें और बरामदगी पर एक नजर...
नकबजनी : 333
सामान की कीमत : 4 करोड़ 8 लाख 5 हजार 580 रुपए।
बरामदगी की कीमती : 1 करोड़ 19 लाख 96 हजार 655 रुपए। (29.39 प्रतिशत)
चार पहिया वाहन चोरी : 115
चोरी के वाहन की कीमत : 6 करोड़ 31 लाख 60 हजार रुपए।
बरामद वाहनों की कीमत : 5 करोड़ 5 लाख 75 हजार रुपए। (80 प्रतिशत)
दुपहिया वाहन चोरी : 1286
दुपहिया वाहनों की कीमत : 2 करोड़ 70 लाख 94 हजार रुपए।
बरामद वाहनों की कीमत : 99 लाख 43 हजार रुपए। (36 प्रतिशत)
Updated on:
10 Jan 2020 03:51 pm
Published on:
10 Jan 2020 03:51 pm
