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सोशल मीडिया पर दोस्त बने इन लोगों का एेसा जुनून, सभी को सिखाना चाहते हैं साफा बांधना

- मारवाड़ सोशियल मीडिया सहयोग संस्था की पहल - पांच साल में अब तक एक हजार से अधिक लोगों को सिखा चुके साफा बांधना  
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सोशल मीडिया पर दोस्त बने इन लोगों का एेसा जुनून, सभी को सिखाना चाहते हैं साफा बांधना

अविनाश केवलिया/जोधपुर.
शादी-समारोह पर किसी को साफा बंधवाना होता है तो परिवार के लोगों को यहां-वहां दौड़ लगानी पड़ती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के मित्रों के एक समूह ने पांच साल पहले मारवाड़ी संस्कृति को जीवित रखने के लिए एक पहल शुरू की। युवाओं को नि:शुल्क साफा बांधना सिखाने लगे। अब तक एक हजार से अधिक लोगों को यह कला सिखा चुके हैं। अब भारतीय नववर्ष से पहले एक बार फिर इसी प्रकार का एक प्रशिक्षण शिविर लगाकर सैकड़ों लोगों को सिखाने की कवायद की गई है।

मारवाड़ सोशियल मीडिया सहयोग संस्थान से जुड़े मुख्य साफा प्रशिक्षक मनोज बोहरा ने बताया कि पिछले पांच साल से वे प्रत्येक वर्ष 300 से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस बार भारतीय नववर्ष से पूर्व एक सप्ताह तक फिर से शिविर लगाकर युवाओं को साफा बांधने की कला सिखाई जाएगी। इस संस्था से जुड़े लोगों की एक टीम आनन्द जोशी, रंजन पुरोहित, सुनील पुरोहित ढबसा, रामजी व्यास, कन्हैयालाल पुरोहित आनंद सी.पुरोहित, भागीरथ वैष्णव, राहुल बोड़ा, रमेश सिसोदिया, दीपक थानवी, शरद पुरोहित लगातार सोशल मीडिया पर इस संस्कृति बचाने की मुहिम को लोगों तक पहुंचा रही है और हर वर्ष नि:शुल्क शिविर में अधिक से अधिक लोगों को जोडऩे का काम करती है।

बढ़ता जा रहा क्रेज

इस कार्यक्रम के प्रति शहरवासियों का क्रेज हर साल बढ़ रहा है। भूतनाथ मंदिर परिसर में एक अप्रेल से इस बार यह शिविर फिर से लगेगा। इस कार्यक्रम में इस बार वीर दुर्गादास राठौड़ स्मृति समिति भी सहयोगी बन रही है।

मारवाड़ समारोह में रखी थी साफा थीम

साफे को प्रोत्साहन देने के लिए पूर्व जिला कलक्टर रवि कुमार सुरपुर ने मारवाड़ समारोह के दौरान एक दिन साफे की थीम रखी थी। साफा दिवस के दिन कर्मचारियों को भी साफा पहन कर आने के लिए प्रेरित किया था। दो साल तक इस परम्परा को निभाया गया। अब तीसरे साल भी जिला प्रशासन से ऐसी ही उम्मीद है।