
मरुधरा में सजे कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र तक के संस्कृति रंग
जोधपुर. राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से राष्ट्रीय स्तर के तीन दिवसीय लोकानुरंजन मेले का आगाज गुरुवार को जयनारायण व्यास स्मृति भवन टाउन हॅाल में कोविड-19 की नियमों की पालना के साथ किया गया। लोक कला महाकुंभ में देश के नौ राज्यों के कलाकारों ने लघु भारत की सांस्कृतिक झांकी के साथ लोक संस्कृति को साकार किया।
जोधपुर एहसान साथियों का सामूहिक शहनाई वादन और गोविन्द मीरासी तीन ढोल बांकियां वादन के संगम ने श्रोताओं व अतिथियों का संगीतमय स्वागत किया। प्रथम सत्र में खुले प्रांगण में शाहबाद के सहरिया नृत्य, जानकीलाल चांचोड़ा का चकरी नृत्य, लक्ष्मण गढ़ की शशिकला सखियों का बम नृत्य, बांदीकुई के अकरम ने बहुरूपिया स्वांग से, उस्मान खां ने जादूगरी करतब, भारतीय लोक कला मंडल की कठपुतली प्रस्तुति, बालोतरा की युवा गेर एवं गोपालराम के ढफ नृत्य ने दर्शकों के बीच समां बांधा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला तथा हरियाणा कला परिषद कुरूक्षेत्र के सहयोग से आयोजित लोक कला के महाकुंभ में देश के नौ राज्यों के कलाकार अपनी लोकरंजन परम्परागत लोक कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। मेले का आगाज राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने नाद वादन के साथ शुभारंभ किया। बोराणा ने कहा सांस्कृतिक राजस्थानी व देश की संस्कृति का जीवंत दस्तावेज के रूप में लोकानुरंजन मेला हमारे सूर्यनगरी के ललाट पर शोभायमान है।
टाउन हॉल सभागार में गूंजी तालियां
कोविड गाइडलाइन पालना के साथ शाम 7.15 से टाउन हॉल प्रेक्षागृह के अंदर मंच पर इरफान खान एवं साथी श्रीनगर जम्मू कश्मीर के कलाकारों की ओर से रूफ नृत्य, उतराखंड छपेली नृत्य, महेन्द्र भाई लतीपुर गुजरात गरबा नृत्य, हरियाणा अरमिन्दर सिंह एवं साथियों का पटियाला पंजाब का गिद्धा नृत्य, महाराष्ट्र के लावणी नृत्य तथा रोहतक के फाग नृत्य की प्रस्तुति पर समूचा सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।
Updated on:
19 Feb 2021 02:27 pm
Published on:
19 Feb 2021 02:27 pm
