
बदले मौसन ने फिर पहुंचाया जीरे की फ सल को नुकसान, बादलों व बुंदाबूंदी से 40 प्रतिशत फसल खराब
अमित दवे/जोधपुर. जिले में करीब 4 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बोई फ सलों से किसान अच्छे उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन गत कई दिनों से बादलों की आंखमिचौली से खेतों में खड़ी फसलें, विशेषकर जीरे की फसल प्रभावित हुई है। जीरे की फ सल में झुलसा (चरमा) का प्रकोप पहले ही बढ़ रहा था, मंगलवार को हुई बंूदाबूंदी से पकाव पर आई जीरे की फ सल प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तरह नष्ट होने का अंदेशा है। क्षेत्र में एफि ड (मैला/मोयला) से भी जीरे की फ सल में खराबा हुआ है।
जिले के बाप, फ लोदी, बापिणी, ओसियां सहित जालोर, जैसलमेर में हल्की बारिश ने मारवाड़ का लोकप्रिय गीत ‘जीरो जीव रो बैरी, मत बाओ मारा परणया जीरो ’ की याद मारवाड़ के किसानों को दिला दी। इससे किसान मुंह आए निवाले के छिन जाने का अंदेशा है। किसानों के अनुसार इन क्षेत्रों में करीब 40 प्रतिशत जीरे की फसल का नुकसान बताया जा रहा है।
बीमे का नहीं मिलता किसानों को लाभ
जीरा रबी सीजन की फ सल है। इस दौरान सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्र में ही इस फ सल की बुवाई होती है। सिंचित क्षेत्र में मल्टीक्रॉप के चलते लगभग सभी किसान बैंकों से फ सली ऋ ण लेते हैं। ऋ णी किसानों के लिए फ सल बीमा अनिवार्य होने से जीरे की लगभग पूरी फ सल प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित है लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता से किसानो को इसका लाभ नहीं मिला पाता है।
रबी 2018-19 बुवाई रकबा लाख हैक्टेयर में
फ सल --- बुवाई रकबा
जीरा -- 1.55
सरसों -- 1.00
गेहंू -- 0.70
चना --- 0.20
इसबगोल --- 0.15
मैथी -- 0.10
धनिया -- 0.05
अन्य -- 0.27
कुल - 4.02
इनका कहना है...
जीरे की फसल में मौसम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मौसम के प्रतिकूल रहने से नमी वाला या काला रंग का जीरा होने से मंडिय़ों में किसानों को जीरे के सही दाम नहीं मिलेंगे और व्यापार भी प्रभावित होगा।
पुरुषोत्तम मूंदड़ा, अध्यक्ष, जोधपुर जीरा मंडी व्यापार संघ
‘बादल व बूंदाबांदी से जीरे की फसल को नुकसान हुआ है। प्रशासन, कृषि विभाग व बीमा कंपनियों की ओर से प्रभावित किसानों को समय पर फसल बीमा का लाभ दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
तुलछाराम सिंवर आंदोलन प्रमुख, भारतीय किसान संघ, जोधपुर प्रांत
Published on:
14 Mar 2019 11:53 am
