11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जीरे की फसल पर संकट के बादल

फलोदी (जोधपुर). क्षेत्र में मौसम तंत्र आए अचानक बदलाव से जीरे की फसल पर संकट बादल मंडराने शुरू हो गए है।
2 min read
Google source verification
Cumin crop in crisis in Phalodi

जीरे की फसल पर संकट के बादल

फलोदी (जोधपुर). क्षेत्र में मौसम तंत्र आए अचानक बदलाव से जीरे की फसल पर संकट बादल मंडराने शुरू हो गए है। दरअसल शुक्रवार को दिन-भर क्षेत्र में बादल छाए रहने से जीरे की फसल में रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में कृषि विज्ञान केन्द्र, फलोदी के वैज्ञानिकों ने भी जीरे में झुलसा रोग लगने की आंशका जता दी है तथा इस रोग पर नियंत्रण को लेकर उपाय भी
बताए है।


झुलसा रोग के लक्षण
कृषि विज्ञान केन्द्र, फलोदी के मुख्य वैज्ञानिक अध्यक्ष व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्रसिंह चांदावत ने बताया कि जीरे की फसल में फूल आने शुरू होने के बाद आकाश में बादल छाए रहें तो झुलसा या ब्लाइट रोग की आशंकाएं बढ़ जाती है। इस रोग में पौधों की पत्तियों व तनों पर गहरे भूरे-बैंगनी रंग के धब्बे पड़ जाते हैं तथा पौधों के शीर्ष भाग जमीन की तरफ झुकने लगते हैं। जीरे में यह रोग अत्यधिक तेजी से फैलता है तथा लक्षण दिखाई देते ही प्रबंधन के उपाय करने आवश्यक हो जाते हैं। अगर रोग पर नियंत्रण न हो तो फसल में भारी नुकसान की संभावना रहती है।

यह करें उपाय
पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. गजानंद नागल ने बताया कि जीरे में झुलसा रोग के प्रबंधन के लिए बुवाई के 30-35 दिन बाद फसल पर दो ग्राम मेन्कोजेब 80 डब्ल्यू पी अथवा हेक्साफोनाजोल 4 प्रतिशत व जाइनेब 68 प्रतिशत के बने हुए मिश्रण को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करना चाहिए। साथ ही जीरे में खड़ी फसल उखटा रोग या विल्ट से प्रभावित होने पर पौधे मुरझा जाते है। इसके प्रबंधन के लिए 2.5 किलो ट्राइकोडर्मा विरिडी मित्र फफूंद प्रति सौ किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर खेत में भुरकाव करके हल्की सिंचाई करनी चाहिए।

खेतों का निरीक्षण
आसोप. इधर, कृषि विभाग किसानो के खेतो का निरीक्षण कर फसल में आवश्यक पोषक तत्वों का प्रबंधन व प्रयोग की सलाह किसानों को दी। कृषि पर्यवेक्षक रफ ीक अहमद कुरैशी ने जीरा फसल निरीक्षण करते हुए कहा की फसल में फास्फोरस पोटाश की मात्रा के साथ-साथ चौथे तत्व सल्फर की आवश्यकता होती हैं। बुवाई पूर्व भूमि में 250 किलोग्राम जिप्सम अथवा गन्धक की पूर्ति की गयी है तो निश्चित रूप से फसल अच्छी होगी।