
AGRICULTURE UNIVERSITY--जीरा-सौंफ फ्लेवर के शहद का महत्व ज्यादा, प्रदेश में होगा शोध
जोधपुर।
सेहत को सुधारने व आयुर्वेद में कई औषधियों के निर्माण के लिए शहद का प्रयोग किया जा रहा है। विभिन्न फसलों व पेड़ों से उत्पादित शहद में नीम, जीरा व सौंफ फ्लेवर वाले शहद का ज्यादा महत्व है। प्रदेश में जीरा-सौंफ के सर्वाधिक उत्पादन को देखते हुए यहां मधुमक्खी पालन के लिए शोध किया जाएगा, इसके लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड ने कृषि विश्वविद्यालय को मधुमक्खी पालन के लिए प्रोजेक्ट दिया है। दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में मधुमक्खी पालन में रोजगार के बढ़ते अवसरों को देखते हुए युवाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़ा भी जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले विवि के उप केन्द्र सुमेरपुर में शोध कार्य शुरू होगा। शोध के तहत शहद उत्पादन में कौनसी फसल या पेड़ जिनसे उत्पादित शहद की गुणवत्ता ज्यादा अच्छी होती है एवं शहद की उत्पादकता ज्यादा रहती है। इन तथ्यों को ध्यान रखते हुए मधुमक्खी पालन किया जाएगा। शोध के तहत नीम,जीरा-सौंफ के अलावा आम, अनार, नीम्बू, बेर, सेंजन, जामुन आदि वृक्षों से उत्पादित शहद की भी उत्पादकता व गुणवत्ता का परीक्षण किया जाएगा
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यहां मधुमक्खी पालन की संभावनाएं ज्यादा
प्रदेश में जालोर के सुन्धा माता पहाड़ी क्षेत्र, सिरोही में आबू रोड का तलहटी क्षेत्र, सुमेरपुर, बाली व पाली का अरावली पहाड़ी क्षेत्र में मधुमक्खी पालन की संभावनाएं ज्यादा है।
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हजारों ग्रामीण युवाओं को जोड़ा जाएगा
विश्वविद्यालय को प्रोजेक्ट के तहत 13.62 लाख रुपए का फण्ड मिला है। प्रोजेक्ट में युवाओं को राज्य स्तरीय सेमिनार, प्रशिक्षण, वेबिनार व विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत मधुमक्खी पालन प्रोत्साहन के लिए हजारों ग्रामीण युवाओं को जोड़ा जाएगा। युवाओं के समूह बनाकर विवि के अनुसंधन केन्द्रों पर शहद का संग्रहण, उत्पाद निर्माण, परीरक्षण व विपणन कार्य किया जाएगा। इससे इन क्षेत्रों के युवा किसानों को स्वरोजगार प्राप्त होगा।
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विश्व में शहद उत्पादन में भारत छठें नम्बर पर
शहद उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने तेजी से बढ़ोतरी की है और पूरे विश्व में छठें स्थान पर है। एपिड़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 2019-20 में लगभग 59 हजार टन प्राकृतिक शहद का निर्यात कर लगभग 633 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा अर्जित की है। भारत से शहद आयातक प्रमुख देश अमरीका, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर आदि है।
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राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की यह परियोजना अच्छी गुणवत्ता वाले शहद उत्पादन के लिए शोध के अलावा ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोडऩे की दिशा में मुख्य भूमिका निभाएगी।
राजू भारद्वाज, प्रभारी अधिकारी
कृषि अनुसंधा केन्द्र, सुमेरपुर
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Published on:
30 Jan 2021 06:55 pm
