
अरब सागर की जगह बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवातों ने रोका टिड्डी का रास्ता
जोधपुर. थार में मानसून के तीन महीने हो गए हैं और अब इसकी विदाई की बेला आ गई है। इस बार मानसून काल के दौरान अरब सागर से एक भी चक्रवाती तूफान नहीं बनने से टिड्डी आने की आशंकाएं अब पूरी तरीके से खत्म हो गई हैं। इस साल कम दबाव के अधिकांश क्षेत्र व चक्रवात बंगाल की खाड़ी से बने थे। भारत और पाकिस्तान की ओर से लगातार किए जा रहे सर्वे में भी टिड्डी नहीं मिली है। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के बैनर तले मंगलवार को दो महीने बाद दोनों देशों की वर्चुअल बैठक होगी, जिसमें अफगानिस्तान व ईरान भी भाग लेंगे। बैठक में टिड्डी सर्वे रिपोर्ट और अगले साल टिड्डी रोकने के उपायों पर मंथन होगा।
भारतीय उपमहाद्वीप में टिड्डी हमले का समय जून से नवम्बर के दरम्यान होता है। मानसून ऑनसेट होने के समय अफ्रीकी देशों से अरब के रेगिस्तान को पार करके टिड्डी ईरान, पाकिस्तान होते हुए भारत आती है। पश्चिमी हवाएं और अरब सागर में उठे तूफान टिड्डी को आगे बढऩे में मदद करते हैं। गत वर्ष 26 साल बाद हुए टिड्डी के बड़े हमलों में भी अरबसागीय चक्रवाती तूफानों का विशेष योगदान था लेकिन इस बार केवल मई में ताउते तूफान को छोडकऱ अरब सागर शांत रहा। साथ ही पश्चिमी हवाएं भी बहुत कम चली।
सर्वे में हॉपर भी नहीं मिले
भारत की ओर से कच्छ की खाड़ी, जैसलमेर और बाड़मेर बॉर्डर पर चार महीने से लगातार सर्वे किया जा रहा है। सर्वे में न तो टिड्डी रिपोर्ट की गई है और न ही टिड्डी के हॉपर। मई-जून में एकबारगी ईरान के कुछ हिस्से में हॉपर जरुर मिले थे लेकिन उन्हें समय पर नियंत्रण कर लिया गया।
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‘अभी तक के सर्वे में कहीं भी टिड्डी रिपोर्ट नहीं हुई है। एफएओ के नेतृत्व में सोमवार को दक्षिण एशिया सहयोग संगठन की बैठक है। इसमें टिड्डी को लेकर चर्चा की जाएगी।’
- वीरेंद्र कुमार, सहायक निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर
Published on:
27 Sept 2021 07:46 pm
