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कोरोनाकाल में फिरेंगे जंगली गधों के दिन

-जोधपुर संभाग के जालौर जिले में रण खार कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र की तैयारी - जंगली गधों सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण और परिक्षेत्र विकास के लिए सेंचुरी बनाने का होगा प्रयास- नए इको टूरिज्म स्थल के रूप में भी विकसित करने तैयारी
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कोरोनाकाल में फिरेंगे जंगली गधों के दिन

कोरोनाकाल में फिरेंगे जंगली गधों के दिन


नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. जोधपुर संभाग के सांचौर तहसील से 57 किलोमीटर दूरी पर चितलवाना तहसील के रण खार गांव के आसपास रहने वाले जंगली गधो के दिन फिरने वाले है। रण खार जंगली गधे का प्राकृतवास करीब 6227 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है जिसे कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करवाने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। जंगली गधे के अलावा क्षेत्र में चिंकारा, जंगली बिल्ली और जरख भी बहुतायत में पाए जाने से भविष्य में सेंचुरी घोषित करने का भी प्रस्ताव है। जोधपुर संभागीय मुख्य वन संरक्षक एसआरवी मूर्ति ने क्षेत्र का दौरा कर दुर्लभ जंगली गधे के संरक्षण व विकास के लिए वन अधिकारियों को विस्तृत चर्चा के बाद कार्य योजना तैयार करने को कहा है। संभागीय आयुक्त डॉ समित शर्मा ने भी इस योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाने को मंजूरी प्रदान की है। इसके लिए 1 दिसंबर को जालौर जिले के रण खार कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में जंगली गधे के संरक्षण एवं परिक्षेत्र के विकास के संबंध में कार्य योजना तथा क्षेत्र के इको टूरिज्म की दृष्टि से विकास की संभावनाओं को लेकर वन अधिकारियों व पर्यावरण तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के साथ वीसी के माध्यम से चर्चा की जाएगी । जोधपुर संभागीय आयुक्त संभाग के अधीन 6 जिलों के वन अधिकारियों से वन्य जीव संरक्षण, कंजरर्वेशन रिजर्व घोषित करने आदि विषयों पर चर्चा करेंगे।

कच्छ के रण का ही विस्तार
रणखार गांव का क्षेत्र कच्छ के रण का ही विस्तार है जिसमें दुर्लभ जंगली ***** (घुडख़र ) पाया जाता है। क्षेत्र में पाए जाने वाली सेवण, गंठिया, भरूट, करड, लाणा घास वेटलैंड क्षेत्र में बहुतायत में पाई जाती है जो जंगली गधों का प्रमुख आहार भी है। यह एक वन्य पशु है जो दक्षिण एशिया का देशज है। घुडख़र यानी घोड़ा और ***** (खर)। इसे गुजरात का जंगली ***** या बलूची जंगली गदहा भी कहते हैं।

दौडऩे की रफ्तार ७० किमी प्रति घंटा
कच्छ के रण में पाया जाने वाला अनोखा प्राणी जो न ***** है, न घोड़ा है, न दोनों के मेल से बनने वाला खच्चर है। घुड़खर का वजऩ लगभग ढाई सौ किग्रा होता है और यह अधिकतम 70 से 80 किमी तक रफ्तार से दौड़ सकता है। लुप्तप्राय जीवों में होने से घुडख़र को वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के अंतर्गत प्रथम सूची में रखा गया है। अमिताभ बच्चन ने घुडख़र का कैंपेन विज्ञापन किया था।


केन्द्र व राज्य सरकार को प्रपोजल की तैयारी
संभाग के सांचौर तहसील से 57 किलोमीटर दूरी पर वनभूमि और कुछ राजस्व भूमि में जंगली गधों सहित कई तरह के दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतवास है। एेसे में जैव विविधता और वन्यजीवों से परिपूर्ण क्षेत्र को विकसित करने के लिए कंजर्वेशन रिजर्व अथवा सेंचुरी घोषित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए राज्य व केन्द्र सरकार को प्रप्रोजल भेजने की तैयारी है। जोधपुर संभागीय आयुक्त 1 दिसंबर को सभी वन अधिकारियो से वीसी चर्चा करेंगे।
-एसआरवी मूर्ति, मुख्य वन संरक्षक जोधपुर संभाग