
मंजिल तक पहुंचना मुश्किल, आज तक जेडीए नहीं भर पाया गड्ढ़े
गहरे गड्ढ़े होने से ऑटो वाले भी जाने से कतराते हैं, बारिश में बाइक से भी निकलना मुश्किल
बनाड़. बनाड़ रोड स्थित धापी मार्बल से कुम्हारों की ढ़ाणी जाने वाली करीब तीन किलोमीटर की रोड गड्ढ़ो में तब्दील हो चुकी है। लंबे समय से खस्ताहाल इस सड़क पर हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन जोधपुर विकास प्राधिकरण लापरवाह बना हुआ है। पेयजल लाइन बिछाने के लिए इस सड़क को खोदा गया, लेकिन बाद में इस खुदी सड़क को मि डाल कर छोड़ दिया गया। हालत यह है कि पावटा से कुम्हारों की ढ़ाणी के पास स्थित सरकारी स्कूल तक जाने वाले ऑटो आधे रास्ते से ही लौट आते हैं, जिससे ऑटो में आने-जाने वाले यात्रियों को आधे रास्ते पैदल ही सफर तय करना पड़ रहा है।रोड पर बारिश के समय लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। इसी रोड से नांदड़ा खुर्द, उचियाराड़ा, जालेली सहित अन्य गांवों के लोग सफर करते हैं। यह रोड बनाड़ रोड़ से कुम्हारों की ढ़ाणी के पास डिगाड़ी से नांदड़ा खुर्द होते हुए उचियारड़ा की ओर जाने वाली सड़क को भी जोड़ती है।
रोड लाइट और सीवरेज की भी परेशानी
इस रोड के दोनों और कई कॉलोनियां बसी हैं, जहां हजारों की संख्या में आबादी रहती है, जो सड़क, रोड लाइट और सीवरेज की समस्या से परेशान है। सड़क खराब होने के कारण बच्चों को स्कूल लाने- ले जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। बारिश के समय दुपहिया वाहन से लोग इस रोड से निकल नहीं पाते है।
यह सड़क पहले कम क्षतिग्रस्त थी, फिर पानी की लाइन बिछाने के लिए तीन साल पहले और खोद दिया, जिसके बाद सड़क नाम की बची है।
अणदाराम प्रजापत।
रोड पर इक्की-दुक्की रोड लाइटें लगी है वह भी खराब हो चुकी है। सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढ़े हैं कि रात को अंधेरे में दुपहिया वाहन चालकों के गिरने की घटनाएं होती है।
नाथूलाल आचार्य
सड़क को बरसों पहले कॉलेनाइजर ने बनवाया था। उसके बाद सरकारी फंड से बनी, लेकिन इसकी मरम्मत नहीं होने से पूरी तरह उखड़ गई। जो कुछ बची थी, उसे पानी की लाइन डालने के लिए खोद दिया गया।
सगराम चौधरी
रोड के दोनों ओर बसी कॉलोनियों में सीवरेज नहीं है। लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जेडीए सड़क बनाने की योजना बना रहा है। ऐसे में उसे पहले सीवरेज लाइन डालनी चाहिए। ऐसा नहीं किया तो सड़क को दोबारा तोडऩा पड़ेगा।
सूरज सिंह
खस्ताहाल सड़क के चलते बच्चों को स्कूल लाने- ले जाने में परेशानी आती है। बारिश के समय उन्हें बाइक से छोडऩा भी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि रास्ते में पानी भर जाता है।
राजेश
हमें सड़क खराब होने के कारण पावटा से सवारियों को बिठाने से पहले ही बताना पड़ता है कि वह इस रास्तें पर कुम्हारों की ढ़ाणी से पहले आधे रास्ते तक ही जाएंगे। ऐसे में सवारियों को आधे रास्तें पैदल जाना पड़ता है।
महेंद्र कुमार, ऑटो चालक
पिछले तीन साल से सड़क की इतनी दुर्दशा है कि ऑटों चालक आए दिन नुकसान उठाते हैं। ऑटो के इनमें गिरने से एक्सल और पट्टे तक टूट जाते है।
किशोर सिंह, ऑटो चालक
Published on:
23 Apr 2018 05:27 pm
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