11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एककोशिय परजीवी अमीबा कर रहा पाचनतंत्र ध्वस्त

  - दूषित खान-पान के कारण बढ़ रही समस्या - एम्स माइकोबायोलॉजी विभाग की अनुसंधान रिपोर्ट
2 min read
Google source verification
एककोशिय परजीवी अमीबा कर रहा पाचनतंत्र ध्वस्त

एककोशिय परजीवी अमीबा कर रहा पाचनतंत्र ध्वस्त

जोधपुर. हमारी बदली दिनचर्या यानि खान-पान में शुद्धता नहीं रखना पाचनतंत्र को ध्वस्त कर रहा है। एककोशिय परजीवी अमीबा इसका बड़ा कारण है जो कि खाने के जरिये हमारे शरीर में जाकर हमारी आंत व लीवर को नुकसान पहुंचा रहा है। यह खुलासा जोधपुर एम्स माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एक अनुसंधान में हुआ है।

अमिबायसिस नामक बीमारी में हिस्टोलिटिका परजीवी इंसानों के लिए घातक साबित होता जा रहा है। इस बीमारी का कारण साफ-सफाई का अभाव, दूषित भोजन, पानी और गंदी जगह मल-मूत्र त्यागने से हिस्टोलिटिका के सिस्ट हमारे शरीर में घुस जाते है। कई बार बीमारी पकड़ में न आने तक मरीज की मौत तक हो रही है।

एम्स माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विभोर टाक ने बताया कि इस बीमारी की दो स्टेज पाई जाती है। इसमें एक ट्रोफोजाइड व दूसरी सिस्ट। सिस्ट फ्रॉम, जिसमें प्रदूषित खाना व पानी के सेवन से ये आंतों में घुसता है। फिर ट्रोफोजाइड फ्रॉम में तब्दील हो जाता है। इससे खून की दस्ते शुरू हो रही है। ये बीमारी कई बार आंतों में छेद करके ब्लड के रास्ते लीवर में चली जाती है। लीवर में जाकर पस इकट्टी करती है। इससे पीलिया हो रहा है। अल्ट्रा साउंड जांच में पस का कलक्शन भी देखा जा सकता है। कई बार बीमारी पकड़ न आने पर फेफड़े व शरीर के अन्य अंगों तक नुकसान हो जाता है, इसमें भूख न लगना, उल्टी होना व दस्त लगातार लगना जैसी समस्याएं सामने आती है।

1 लाख की मौत में तीसरा कारण अमिबियासिस
दुनिया में 1 लाख लोगों की मौत में अमिबासिस्ट बीमारी तीसरा बड़ा कारण है। जिनको इंफेक्शन होता है, उनके ब्लड के सैंपल भी लिए जाते है। ब्लड में परजीवी के खिलाफ एंटीबॉडी बननी शुरू हो जाती है। उससे इंफेक्शन की जानकारी मिल जाती है। शोध के समय 34 लोगों की जांच में 21 में बीमारी पकड़ में आई है। इसका मवाद भूरे-लाल रंग का होता है। इस शोध में डॉ. टाक के अलावा माइक्रोबायोलॉजी एचओडी डॉ. विजयलक्ष्मी नाग, सीनियर रेजिडेंट डॉ. यशिक बंसल, मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गोपालकृष्ण बोहरा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार व रेडियो डाइग्नोसिस विभाग में एसोसिएट डॉ. तरुणा यादव शामिल रहीं।