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इस अस्पताल में गंदगी फैलाई तो अब लगेगा चार गुना जुर्माना

पत्रिका की खबर का असर : एमडीएम अस्पताल ने जुर्माना राशि 50 रुपए से बढ़ाकर 200 रुपए की
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Dirt spread in hospital, Fines will be 200 Ruppes

इस अस्पताल में गंदगी फैलाई तो अब लगेगा चार गुना जुर्माना

जोधपुर.
संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल में अब गंदगी फैलाने वालों की खैर नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने गंदगी फैलाने वालों से सख्ती से निपटने की तैयारी की है। अब यदि कोई भी व्यक्ति पान मसाला थूकते या किसी भी प्रकार की गदंगी करते या कचरा फैंकते पाया गया तो उससे 200 रुपए प्रत्येक बार में जुर्माना वसूला जाएगा। इससे पहले अस्पताल में यह जुर्माना राशि 50 रुपए थी।


अस्पताल प्रशासन ने यह सख्त रूख गंदगी रूपी गुलामी से निजात पाने के लिए अपनाया है। आजादी के जश्न के दिन से इस आदेश की पालना शुरू कर दी गई है। सभी सुरक्षा गार्डों को नई दर से जुर्माना राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। जो व्यक्ति गंदगी करते पकड़ा जाएगा, उसे जुर्माना लेकर कैश काउंटर से रसीद काट कर दी जाएगी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी ने बताया कि जुर्माना राशि बढ़ाकर 200 रुपए की गई है। सभी सुरक्षा गार्डों को पाबंद कर दिया गया है। इसके अलावा स्टाफ की एक निगरानी टीम भी बनाई गई, जो गंदगी फैलाने वालों पर गहनता से नजर रखेगी। गंदगी करते पकड़े जाने पर 200 रुपए का जुर्माना रसीद देकर वसूला जाएगा। अस्पताल में जगह-जगह नई जुर्माना राशि की सूचना भी चस्पा की जा रही है।


एम्स में भी है 200 रुपए का जुर्माना-
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गंदगी या कचरा फैलाने, थूकने पर प्रत्येक बार 200 रुपए का जुर्माना निर्धारित है। और जुर्माना वसूली में पूरी तरह सख्ती के निर्देश है। पिछले दिनों जिला कलक्टर ने चिकित्सा अधिकारियों ने एम्स का जायजा लिया था और उन्हें एम्स जैसी सफाई रखने के निर्देश दिए थे।


पत्रिका ने उठाया था मुद्दा-
पिछलें दिनों राजस्थान पत्रिका ने सरकारी अस्पतालों में गंदगी रहने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। 28 जुलाई के अंक में न सीसीटीवी और न जुर्माना, फिर साफ कैसे रहेंगे हमाारे अस्पताल शीर्षक से प्रकाशित खबर में यह सवाल भी किया था कि जब एक ही शहर में एम्स इतना साफ-सुथरा रह सकता तो सरकारी अस्पताल एमडीएमएच और एमजीएच के हालात साफ-सुथरे क्यों नहीं रह सकते। इसके बाद मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक में सदस्यों ने भी अस्पताल अधीक्षकों को सवाल करते हुए घेर लिया था कि लाखों की राशि खर्च करने के बावजूद अस्पताल साफ क्यों नहीं हैं? तब अस्पताल अधीक्षक जवाब भी नहीं दे सके थे।