2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कहीं धूप से बचने के लिए झोपड़ी का सहारा तो कहीं बारिश में घुटनों तक पानी

- डिस्कॉम की सिविल विंग के पास पेंडिंग है कई प्रस्ताव- १०० से ज्यादा एेसे जीएसएस जहां बनाने के बाद से ही डिस्कॉम ने छोड़ दी कमी फोटो

2 min read
Google source verification
electricity,jodhpur news,jodhpur discom,

- डिस्कॉम की सिविल विंग के पास पेंडिंग है कई प्रस्ताव

जोधपुर. कड़ी धूप में कहीं सिर छुपाने के लिए छत नहीं है तो कहीं बारिश आती है तो घुटनों तक पानी भर जाता है। कई जगह तो हालात एेसे भी है कि निर्माण सामग्री व कचरा डाल कर कब्जा करने से भी लोग नहीं चूक रहे। यह हालात जोधपुर डिस्कॉम के कई वितरण जीएसएस के हैं। जिनमें सुविधाएं बढ़ाने के लिए सालों से प्रस्ताव चल रहे है। अभी डिस्कॉम क्षेत्र के एेसे १०० से ज्यादा जीएसएस हैं जहां कोई न कोई कमी चल रही है।
------------
केस १ - सिर झुपाने के लिए जगह नहीं फलोदी क्षेत्र में कई जीएसएस एेसे हैं जहां सिर छुपाने के लिए भी जगह नहीं है। यहां ग्रामीण क्षेत्र में तो एक कर्मचारी जो यहां कार्यरत रहता है वह या तो धूप के साथ मशीनों का सहारा लेकर सहारा ढूंढता है या फिर एक कच्ची झोपड़ी बनाकर आसरा खुद ने ही तैयार किया है।
केस - २ घुटनों तक पानी शहर के लालसागर क्षेत्र में वितरण जीएसएस में बारिश के दिनों में घुटनों तक पानी भर जाता है। कर्मचारी यदि बिजली सप्लाई शुरू या बंद करने जाता है तो भी हर समय खतरे में रहता है। करंट लगने से कई हादसे भी हो जाते हैं। पानी निकासी की व्यवस्था सालों से नहीं हुई।
केस - ३ झााडि़यों से होती परेशानी शहर के बीचोबीच कचहरी परिसर में जीएसएस में झाडि़यां उगी हुई है। कई बार तो यह बिजली ट्रिपिंग और हादसे का कारण बनती है। लेकिन डिस्कॉम की ओर से झााडि़यां हटाने की कोई व्यवस्था नहीं है।
केस - ४ यहां हो रहा अतिक्रमण शहर के परिहार नगर जीएसएस में तो निर्माण सामग्री और कचरा डाल कर अव्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही है। यहां लोग कब्जा करने का भी प्रयास कर रहे हैं। इसकी जानकारी भी प्रबंधन को दी गई। यहां जमीन के बदले जेडीए को राशि भी चुकाई गई। लेकिन फिर भी कचरा स्थल नहीं हटा।
अब स्वीकृत हुए तीन करोड़
जोधपुर डिस्कॉम प्रबंधन का दावा है कि पिछले लम्बे समय से अटके सिविल विंग के कार्य अब स्वीकृत हुए हैं। डिस्कॉम क्षेत्र में ७० एनआईटी लगाई गई है। जो कि इसी माह खुलेगी। इसके बाद संभवत: अगले माह से काम शुरू होने की उम्मीद है। करीब ३ करोड़ का बजट जीएसएस की कमियों को दूर करने के लिए दिया गया है।

इनका कहना... हमने कई बार जीएसएस पर असुविधाओं को दूर करने के लिए मांग की है। कई बार तकनीकी कर्मचारी इन अव्यवस्थाओं से हादसे का शिकार भी होते हैं।
- लवजीत पंवार, महामंत्री, जोधपुर विद्युत वितरण निगम श्रमिक संघ(बीएमएस), जोधपुर।
सिविल विंग को स्वीकृति मिली है और हमले एनआईटी लगाई है। ७१ एनआईटी इस माह २१ तारीख को खुलेगी। यदि सभी सफल करती है तो हम सभी जीएसएस की कमियां दूर कर देंगे।
हरपालसिंह, अधिशासी अभियंता, जोधपुर डिस्कॉम, सिविल विंग।