
अंधेरे पर उजाले की जीत का पर्व दीपावली रविवार को परम्परागत रूप से मनाई जाएगी। इस दिन इस दिन सुख, समृद्धि और वैभव के लिए धन की अधिष्ठात्री महालक्ष्मी माता घर-घर विराजेंगी। इनकी गणेशजी के साथ शुभ मुहुर्त में पूजा की जाएगी।
पं. रमेश द्विवेदी के अनुसार शाम को लक्ष्मी पूजा वक्त पांच राजयोग रहेंगे। राजयोग गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नाम के होंगे। इन राजयोगों का निर्माण शुक्र, बुध, चंद्रमा और गुरु ग्रह स्थितियों के कारण बनेंगे। वहीं कई सालों बाद दीपावली पर दुर्लभ संयोग भी देखने को मिलेगा, जब शनि अपनी स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान होकर शश महापुरुष राजयोग का निर्माण करेंगे। इनके साथ आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग भी बनेंगे। दीपावली पर शुभ योगों की ऐसी स्थिति पिछले 700 सालों में नहीं बनी। इतने शुभ संयोग बनने से ये लक्ष्मी पर्व सुख-समृद्धि देने वाला रहेगा। रविवार दोपहर 2.44 बजे तक चतुर्दशी व बाद में अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी।
अगले दिन सोमवती अमावस्या का संयोग
पं. अनीष व्यास ने बताया कि दीपावली के अगले दिन सालों बाद सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। सोमवार को सोमवती अमावस्या है, लेकिन अमावस्या की तिथि दीपावली वाले दिन से शुरू हो रही है, इसलिए इस दीपावली पर सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। लक्ष्मी पूजन में सोमवती अमावस्या का संयोग होना शुभ फलदायी माना गया है। खास बात यह है कि पहले दिन रविवार को अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल होने से इसी दिन दीपावली पर्व मनाया जाएगा। दूसरे दिन उदया तिथि पर सोमवार को भी अमावस्या तिथि होने से सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। प्रदोष काल के समय लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है इसलिए दीपावली का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। वहीं उदया तिथि को मानते हुए सोमवती अमावस्या की पूजा, तर्पण व दान आदि कार्य सोमवार को किए जाएंगे।
महालक्ष्मी पूजन मुहुर्त
- विजय मुहुर्त: महालक्ष्मी पूजन रविवार को मध्याह 2.11 से 2.55 बजे के बीच।
- गोधूलि मुहूर्त शाम 5.50 से 6.16 बजे के बीच।
- वृषभ लग्न स्थिर संज्ञक लग्न शाम 6.00 से 7.57 तक रहेगा, जो लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त है।
- रात 9.38 से 12.22 बजे तक लाभ, अमृत का चौघड़िया रहेगा। यह समय भी लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त माना गया है।
- रात 12.29 से 2.44 बजे तक सिंह लग्न स्थिर संज्ञक लग्न में लक्ष्मी पूजन सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
- सिंह लग्न स्थिर संज्ञक माता महालक्ष्मी का पूजन स्थिर व अक्षय लक्ष्मी को देने वाला है। शास्त्रों के अनुसार सिंह लग्न में माता लक्ष्मी सिंह पर सवार होकर भ्रमण करती है, अतः सिंह लग्न में श्रीसूक्त का पाठ करना उत्तम है।
Published on:
11 Nov 2023 09:50 pm
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