10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

डॉक्टर मरीजों को 2 मिनट भी नहीं देते, केवल नाड़ी देखकर लौटा देते हैं -नोबल लॉरिएट बैनर्जी

- एनआईआईआरएनसीडी के स्थापना दिवस संगोष्ठी में नोबल पुरस्कार विजेता अभिजीत बैनर्जी ने स्वास्थ्य के हालात पर जताई चिंता- जनता को प्रीवेंटिव पावर से अधिक क्यूरेटिव पावर है अधिक भरोसा
less than 1 minute read
Google source verification
डॉक्टर मरीजों को 2 मिनट भी नहीं देते, केवल नाड़ी देखकर लौटा देते हैं -नोबल लॉरिएट बैनर्जी

डॉक्टर मरीजों को 2 मिनट भी नहीं देते, केवल नाड़ी देखकर लौटा देते हैं -नोबल लॉरिएट बैनर्जी

जोधपुर. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अमरीका में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर व वर्ष 2019 के नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ अभिजीत बनर्जी ने कोरोना काल में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर काफी निराशा प्रकट की। उन्होंने कहा कि जिले के बाहर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सुविधाएं ही नहीं है। डॉक्टरों की कमी है। शहर में जो डॉक्टर हैं, अधिक भीड़ के कारण मरीजों को समय नहीं दे पाते। भारतीय डॉक्टर 2 मिनट से भी कम समय मरीज को देते हैं। केवल नाड़ी देखकर प्रेस्क्रीप्शन लिख देते हैं।

बैनर्जी यहां राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसन्धान संस्थान (एनआईआईआरएनसीडी) के स्थापना दिवस पर आयोजित ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता को प्रीवेंटिव पावर से अधिक क्यूरेटिव पावर पर अधिक भरोसा है इसलिए टीका नहीं लगा रहे हैं। यदि उन्हें कुछ इंसेंटिव दे दिया जाए तो वे टीका लगा लेंगे। बैनर्जी ने देश में नॉन क्वालिफाइड डॉक्टरों पर भी चिंता प्रकट की। उन्होंने किराणा की दुकानों पर मिलने वाली दवाइयां और मनमर्जी से फार्मासिस्ट द्वारा लोगों को दवाइयां देने को भी गलत बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव व भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) के महानिदेशक प्रो बलराम भार्गव ने की।

डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने असंचारी रोगो में कार्यान्यन अनुसन्धान पर बल दिया। एनआईआईआरएनसीडी के निदेशक डॉ अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि कार्यान्वयन अनुसंधान एक अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है। कार्यक्रम में रिजॉल्व टू सेव लाइव्स के सीईओ अमरीका से डॉ टॉम फ्रीडेन, लीसेस्टर विवि इंग्लैण्ड से प्रो सैली सिंह, डॉ चेरियन वर्गीज, डॉ स्वरूप सरकार शामिल हुए। आईसीएमआर दिल्ली से डॉ समीरन पांडा, डॉ आरएस धारीवाल ने अपने विचार रखे।