कोरोना काल के बाद योग के प्रति दोगुना उत्साह

कोरोना काल के बाद लोगों में शारीरिक व मानसिक स्थायित्व लाने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पिछले छह माह में योग के प्रति लोगों का रुझान दोगुना बढ़ गया है।

By: Avinash Kewaliya

Published: 17 Mar 2021, 09:07 PM IST

जोधपुर। कोरोना काल के बाद लोगों में शारीरिक व मानसिक स्थायित्व लाने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पिछले छह माह में योग के प्रति लोगों का रुझान दोगुना बढ़ गया है। सर्दियों के सीजन में जब योगाभ्यास करने वालों की संख्या कम हो जाती है, लेकिन पिछला सर्दियों का सीजन भी अधिकांश योग कक्षाओं में हाउसफुल ही गया।

अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए योगाभ्यास के साथ मेडिटेशन का भी बड़ा रोल रहा। फेफड़ों को मजबूत करने के लिए योगाभ्यास लोगों ने किए तो ध्यान योग के जरिये एकाग्रता बढ़ाना भी नहीं भूले। कई उद्यानों में मॉर्निंग योग सेशन चलने लगे हैं। साथ ही योग शिक्षकों ने ऑनलाइन कक्षाएं लेना भी शुरू किया। लोगों ने अपने घर पर ही डिजिटल प्लेटफार्म के जरिये योग का सहारा लिया है।


यह बेसिक योगाभ्यास है

- सूर्य नमस्कार
- शवासन
- कपाल भारती
- अनुलोम विलोम
- भ्रामरी प्राणायाम
- ऊं कार जाप के साथ मेडिटेशन

कोरोना काल के बाद योग के प्रति दोगुना उत्साह

एक्सपर्ट व्यू

योग शिक्षक गजेन्द्रसिंह परिहार के अनुसार कोविड दौर ने लोगों को शारीरिक रूप से तो कमजोर किया ही है, साथ ही मानसिक तौर पर भी लोग कमजोर हुए हैं। कोविड से रिकवर हुए मरीजों में पोस्ट कोविड इफेक्ट भी देखे गए हैं। जैसे शाम के समय थकान और बैचेनी के साथ किसी काम में मन नहीं लगना जैसे मनोवैज्ञानिक असर भी कई लोगों में देखे हैं। परिहार बताते हैं कि उनके पास ऐसे कुछ केस आए हैं जिनको कोविड के बाद मनोवैज्ञानिक दबाव काफी हुआ। जिनको शारीरिक योग से ज्यादा मेडिटेशन की जरूरत थी। प्राणायाम के साथ मेडिटेशन हुआ और अब ऐसे लोग अच्छा महसूस कर रहे हैं। फेफड़ो के लिए योग की डिमांड भी काफी मिल रही है। कपाल भारत, नाडी शुद्धि, भ्रस्त्रिका और कई प्रकार के बंध है जिनको करने से इस रोग में आराम मिलता है।

Avinash Kewaliya
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