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Phalodi: दहेज के लिए की थी पत्नी और मासूम बेटी की हत्या, 9 साल बाद मिला इंसाफ, पति को उम्रकैद, सास-ससुर को भी सजा

Dowry Murder Case: फलोदी में दहेज प्रताड़ना से जुड़े नौ साल पुराने मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय ने विवाहिता और उसकी डेढ़ वर्षीय बेटी की हत्या के केस में अहम फैसला सुनाया है।
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जोधपुर

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Rakesh Mishra

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Updated: 23 Jun 2026, 6:56 PM IST

Dowry Case

फलोदी। दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ना झेल रही एक विवाहिता और उसकी डेढ़ वर्षीय पुत्री की हत्या के नौ वर्ष पुराने मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय, फलोदी ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पति को दोषी करार दिया है। अदालत ने मामले में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पति को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई, वहीं सास-ससुर को भी साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी माना गया। जिला एवं सेशन न्यायाधीश चक्रवर्ती महेचा की अदालत ने वर्ष 2017 के चर्चित दहेज हत्या प्रकरण में यह निर्णय सुनाया। मामला पुलिस थाना जांबा क्षेत्र के धोलासर गांव का है, जहां दहेज की मांग को लेकर विवाहिता समता को लगातार प्रताड़ित किए जाने का आरोप था।

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भाई ने दर्ज कराया था मामला

करीब नौ साल पहले 21 मार्च 2017 को मृतका के भाई हुकमाराम ने जांबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि बहन समता को उसका पति लक्ष्मणराम, सास छोटी देवी, ससुर घेवरराम तथा अन्य परिजन दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे। कई बार समझाइश के बावजूद प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि 19 मार्च 2017 को समता और उसकी डेढ़ वर्षीय पुत्री सरोज की हत्या कर दी गई तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शवों को दफनाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

नौ साल चली सुनवाई

पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विस्तृत जांच की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पति लक्ष्मणराम, सास छोटी देवी और ससुर घेवरराम के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पति लक्ष्मणराम को दहेज प्रताड़ना, दहेज मृत्यु, साक्ष्य मिटाने और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी माना।

ये सुनाई गई सजा

अदालत ने आरोपी लक्ष्मणराम को विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजाएं सुनाई हैं। दहेज प्रताड़ना के मामले में दो वर्ष का कारावास, दहेज मृत्यु में सात वर्ष का कठोर कारावास, साक्ष्य मिटाने के मामले में छह माह तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत छह माह के कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं सास छोटी देवी और ससुर घेवरराम को साक्ष्य मिटाने के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि की सजा और जुर्माने से दंडित किया गया। मामले में राजस्थान सरकार की ओर से लोक अभियोजक एवं राजकीय अधिवक्ता विजय कुमार ओझा ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया।

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