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गांव के बीच से गुजर रही पानी की लाइन, फिर भी पानी को तरस रहे ग्रामीण

सोडेर की ढ़ाणी गांव के लिए स्वीकृत पानी की टंकी का अन्यत्र निर्माण, गांव में 5 आपूर्ति वाल्व 35 दिन में आती है बारी

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गांव के बीच से गुजर रही पानी की लाइन, फिर भी पानी को तरस रहे ग्रामीण

गांव के बीच से गुजर रही पानी की लाइन, फिर भी पानी को तरस रहे ग्रामीण


जोधपुर/बनाड़. बनाड़ क्षेत्र के सोडेर की ढ़ाणी गांव में लोग बरसो से पानी की किल्लत से जूझ रहे है। वह भी उस स्थिति में कि गांव के बीच से आसपास के गांवों में जलापूर्ति करने वाली पानी की पाइप लाइन गुजर रही हो। कुछ ऐसा ही हो रहा है सोडेर की ढ़ाणी गांव के साथ जहां ग्रामीणों की हालत पानी में रहकर मीन प्यासी जैसी हालत हो चुकी है। गांव के लोगों को मजबूरी में पानी के टैंकर डलवाने पड़ रहे है। गांव में करीब 300 घरों की आबादी है जिन्हें बरसों बाद भी घरों में पानी आने का इंतजार है। गांव में स्कूल के पास बना जीएलआर सूखा पड़ा है। करीब 11 साल पहले गांव के बीच बना पानी का टांका भी जर्जर हो रहा है।

गांव के बीच से निकल रही है पानी की लाइन

सोडेर की ढ़ाणी गांव के बीच से बनाड़ से नांदड़ा कला जाने वाली पानी की लाइन निकल रही है। ऐसे में उसी से सीेधे गांव में आपूर्ति नहीं करके नांदड़ा कला से वापस लाइन डालकर आपूर्ति की जा रही है। गांव मे पांच वाल्व दे रखे है जिनमें से एक वाल्व में सप्ताह में एक दिन आपूर्ति होती है। इस स्थिति में एक वाल्व में आपूर्ति की बारी आने में 35 दिन का समय लगता है। वहीं पानी का प्रेशर कम होने के कारण लाइन के आसपास के घरों में ही पानी पहुंच पाता है। पीछे के घरों में पानी पहुंच ही नहीं पाता है। लाइन के आसपास कई घरों में बनाड़ से नांदड़ा कला जा रही मुख्य लाइन से अवैध कनेक्शन ले रखे है।

विधायक कोष से स्वीकृत टंकी

दूसरी पंचायत में बनाई सोडेर की ढ़ाणी गांव में भोपालगढ़ विधायक कमसा मेघवाल के प्रथम विधायक कार्यकाल में करीब 6 साल पहले विधायक कोष से पानी की टंकी स्वीकृत हुई थी। यह गांव बनाड़ पंचायत क्षेत्र में आता है। यह टंकी बनाड़ क्षेत्र के गांव से भी बाहर नांदड़ा कला पंचायत में बना दी गई। जिसका कारण कुछ राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोगों की दखलअंदाजी रहा था। ऐसे में सोडेर की ढ़ाणी के लोग पानी के टंकी का इंतजार करते ही रह गए। गांव के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी थी कि उनके गांव में बनने वाली टंकी पास की दूसरी पंचायत में स्वीकृत हो चुकी है। अखबारों में समाचार प्रकाशित होने के बाद पता चला था।

क्या कहते है गांववासी
गांववासी बरसों से पानी की किल्लत से जूझ रहे है। शहर के महज पांच से सात किलोमीटर दूरी पर बसे गांव में भी जनता पेयजल की परेशानी से जूझ रही है। इस समस्या को लेकर बनाड़ सरपंच से भी कई बार मिलकर अवगत करवा चुके है। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। खींयराम चौधरी

गांव के बीच से निकल रही पानी की लाइन से आपपास के गांवों में जलापूर्ति हो रही है। लेकिन हमारें गांव के लोग पानी के लिए बरसों से तरस रहे है। गांव वालों को मजबूरन पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे है। टैंकर चालक अपने हिसाब से मनमर्जी का पैसा वसूलते है।

श्याम राम

गांव में करीब 300 से अधिक निराश्रित गोवंश विचरण करता है वह इस भीषण गर्मी में जलाशयों में पानी नहीं होने से मवेशी और वन्यजीव भी भटकते फिरते है। गांववासी कई बार चंदा कर पशुओं के लिए बनी खेलियों को टैंकरों से भरवाते है। लोग जनप्रनिधियों और जलदाय विभाग के अफसरों से शिकायतें कर के थक चुके है।

खींयाराम जाट

गांव से पानी की लाइन निकल रही है लेकिन गांव के लोगों को पानी खरीदना पड़ रहा है। गांव की जीएलआर और टांके सूखे पड़े है। ग्रामीण कई बार शिकायतें करने के बाद भी समाधान नहीं होने से अब उम्मीद छोड़ चुके है। जब पानी आपूर्ति नहीं करनी थी तो स्टोरेज के लिए लाखों रुपए सरकार ने क्यों खर्च किए।

तिलोकराम

जनप्रतिनिधि चुनावों के समय लोगों को उनकी समस्याओं को दूर करने के बादे करते है। लेकिन जैसे ही चुनाव जीत जाते है तो वापस जनता और उनकी समस्याओं को भूल जाते है। विकास कार्यो के नाम पर गांव में पेयजल की ही सुविधा नहीं हो पाई है। तो बाकी क्यां विकास कार्य होंगे।

हनुमान राम

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