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लत छुड़वाने के लिए जा रहे हैं नशा मुक्ति केंद्र तो पहले पढ़ ले ये खबर, कहीं जान पर भारी न पड़ जाए गलती

सूरसागर के कबीर नगर में बिना अनुमति व नियम कायदे ताक पर रख चल रहा है केन्द्र  
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विकास चौधरी/जोधपुर. शहर में एक के बाद एक करके खुलते जा रहे नशा मुक्ति केन्द्र नशेडिय़ों के लिए जानलेवा साबित होने लगे हैं। सूरसागर के कबीर नगर स्थित एक नशा मुक्ति केन्द्र में पांच माह पूर्व एक युवक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। अब एक चालक का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। युवक की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में केन्द्र पहले से संदेह के दायरे में है। अब युवक की मानसिक दशा बिगडऩे से सवालिया निशान उठने लगे हैं। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पहले ही राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) केन्द्र के संबंध में जांच रिपोर्ट मांग चुका है।

पुलिस जांच में सामने आई लापरवाही व अनियमितताएं


रसाला रोड निवासी साजिद पुत्र अनवर खान को नशा छुड़ाने के लिए 26 अप्रेल को कबीर नगर के न्यू लाइफ फाउंडेशन ट्रस्ट के नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती कराया गया था। एक मई की मध्यरात्रि उसकी संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई थी। भाई ने सूरसागर थाने में केन्द्र के संचालक जावेद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने लापरवाही से मौत पर केन्द्र संचालक को दोषी माना, लेकिन फिर भी परिजन जांच से संतुष्ट नहीं हुए। ऐसे में देवनगर थानाधिकारी सुमेरदान ने जांच की। जिसमें नशा मुक्ति केन्द्र की लापरवाही व अनियमिताएं होने की पुष्टि हुई है।

नशा छुड़ाने को भर्ती कराया, याद्दाश्त गई


साजिद की मौत के ठीक तेइस दिन बाद कबीर नगर निवासी हैदर खान को स्मैक छुड़ाने के लिए केन्द्र ले जाया गया, जहां इलाज के नाम पर पांच हजार रुपए पहले और 25 हजार रुपए बाद में लिए गए थे। पेशे से बस चालक हैदर 20 सितम्बर तक वहां रहा। नशा तो छूटा नहीं बल्कि उसका दिमागी संतुलन खराब हो गया। उसकी याददाश्त चली गई। घरवालों का कहना है कि केन्द्र में उसे करंट के झटके दिए जाते थे। साथ ही डण्डों से मारपीट करते थे। उसे नशीली दवाएं सुंघाई जाती थी।

चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी आवश्यक


साजिद की मौत के मामले की जांच में सामने आया कि केन्द्र में पन्द्रह-सोलह पलंग हैं। यानि इतने मरीज का इलाज होता है। इसके लिए चौबीस घंटे अस्पताल में चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी आवश्यक है, लेकिन केन्द्र में ऐसा नहीं है। संचालक का दावा है कि वो दो चिकित्सकों की सेवाएं लेते रहते हैं। जबकि पुलिस के बयानों में दोनों चिकित्सकों ने इससे इनकार किया है। सीएमएचओ ने भी किसी भी नशा मुक्ति केन्द्र के पंजीबद्ध होने से इनकार किया है।