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जोधपुर . जोधपुर के वन क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए फर्जी एनओसी का खेल खेला जा रहा है। भू माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वनभूमि पर हजारों भूखंड बेच चुके हैं। भूतेश्वर वन खंड में जारी एनओसी को तो खुद वन विभाग ही फर्जी बता रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से भूतेश्वर वन खंड में कोई एनओसी जारी नहीं की गई है। हैरत की बात है कि एेसी सैकड़ों एनओसी पर बिजली कनेक्शन तक जारी हो चुके हैं। वन भूमि पर अवैध कब्जों और एनओसी के इस गोलमाल में सर्वोच्च न्यायालय एवं लोकायुक्त के आदेशों की भी धज्जियां उड़ रही हैं।
वन अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के चलते जोधपुर के वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बेशकीमती वनभूमि पर अतिक्रमण बढ़ रहे हैं। खुद ही अधिकारी वन भूमि को हराभरा करने के बजाय इन पर निर्मित भवनों में पानी बिजली कनेक्शन के लिए अंधाधुंध एनओसी जारी कर सीमेन्ट व कंक्रीट के जाल को बढ़ावा दे रहे हैं। वन क्षेत्रों में मिलीभगत और फर्जी एनओसी का खेल यूं ही चलता रहा तो वन क्षेत्र का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए वन संरक्षण अधिनियमि 1980 एवं राजस्थान वन अधिनियम 1953 लागू होने के साथ १२ दिसम्बर १९९६ को सर्वोच्च न्यायालय ने भी वनभूमि पर गैर वानिकी कार्यों पर कड़ी सजा का आदेश दे रखा है।
४० कच्ची बस्तियों में २० हजार अतिक्रमण
शहर के आस-पास कुल 12 वन खंडों में ४० से अधिक कच्ची बस्तियों में २0 हजार से अधिक अतिक्रमण होने के बावजूद वन विभाग की नींद नहीं खुली है। वन भूमि पर भवन निर्माण होता जा रहा है। राजनीतिक संरक्षण के कारण पिछले २५ सालों के दौरान वन भूमि पर बसी बस्तियां तीन गुणा से भी ज्यादा हो गई हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए करोड़ों खर्च कर वन विभाग की ओर से लगाए गए पौधे, कहीं नजर नहीं आते। जिले की बेशकीमती वनभूमि को दो दशक से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने में नाकामी का आलम यह है कि पूरे जोधपुर संभाग में करीब ३० हजार हेक्टेयर वनभूमि राजस्व रिकॉर्ड में शामिल होने के इंतजार में है।
लोकायुक्त के आदेश पर भी नहीं गंभीर
करीब दो साल पूर्व लोकायुक्त एसएस कोठारी ने जोधपुर के वनक्षेत्रों में अतिक्रमण को लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक से पूरी रिपोर्ट मांगी थी। तत्कालीन अधिकारियों ने भूतेश्वर वन क्षेत्र में जिस जगह पर अतिक्रमण ध्वस्त की कार्रवाई की अब उसी भूमि पर फर्जी एनओसी से बिजली कनेक्शन जारी होने के बावजूद वनविभाग चुप्पी साधे हैं। वनक्षेत्र रावटी में वन विभाग के शीर्ष अधिकारी ने २००७ में बनी वन सुरक्षा दीवार खिसकाकर अतिक्रमण करने वालों को भी ५० से अधिक एनओसी जारी की है। खुद वन विभाग के रिकार्ड में जोधपुर जिले में वनक्षेत्र में 444.11 हेक्टेयर कब्जा हो चुका है।
भूतेश्वर में फर्जी एनओसी, रेंजर से जवाब मांगा
भूतेश्वर वन क्षेत्र में हमने कोई एनओसी जारी नहीं की है। प्रथमदृष्टया खसरा-७८१ में डिस्कॉम अधिकारियों की ओर से संदेहास्पद लिखने के बावजूद फर्जी एनओसी पर कनेक्शन जारी किया गया। मंडोर रेंजर और भूतेश्वर वन क्षेत्र के प्रभारी से एनओसी जारी करने के मामले में लिखित में जवाब मांगा है। इस मामले में पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया जाएगा।
बीआर पूनिया, सहायक वन संरक्षक जोधपुर
Published on:
25 Nov 2017 01:58 pm
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