
सत्तर किमी दूर से ही ध्वस्त हो जाएंगे दुश्मन के विमान, मिसाइल व ड्रोन
जोधपुर. बराक एयर डिफेंस सिस्टम गुरुवार को जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर आयोजित एक समारोह में भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इस मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम (एमआरएसएएम) की पहली फायरिंग यूनिट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भारतीय वायुसेना को सुपुर्द की। डीआरडीओ ने यह सिस्टम इजराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री के सहयोग से विकसित किया है। इससे भारतीय वायु सेना का एयर डिफेंस काफी मजबूत हो जाएगा।
एमआरएसएएम 70 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल, सुपर सोनिक मिसाइल, सब सोनिक मिसाइल को हवा में ही निशाना बनाकर ध्वस्त कर देगा। इस सिस्टम से निकलने वाला स्वदेशी रॉकेट मैक-2 की रफ्तार से हवा में ही दुश्मन देश के फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को गिरा देगा। यह स्वदेशी रॉकेट मोटर और नियंत्रण प्रणाली से संचालित है। एमआरएसएएम पाकिस्तान से लगती पश्चिमी सीमा और चीन से लगती पूर्वी सीमा पर स्थापित किया जाएगा।
वायु सेना के लिए गेम चेंजर
इंडक्शन सेरेमनी में डीआरडीओ प्रमुख व रक्षा अनुसंधान विभाग के सचिव जी. सतीश रेड्डी ने वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदोरिया को यह सिस्टम सौंपा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय वायुसेना के लिए गेम चेंजर बताया। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, भारतीय वायु सेना की दक्षिणी पश्चिमी कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल संदीप सिंह, इजराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री के सीईओ बॉएज लेवी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
Updated on:
10 Sept 2021 07:09 pm
Published on:
10 Sept 2021 07:09 pm
