
AGRI UNIVERSITY---30 हजार हॉलर में मूंग-मोठ-बाजरे की 300 किस्मों पर प्रयोग, 12 का ट्रायल सफल
जोधपुर।
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय अन्तरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत लुप्त हो रही स्थानीय फसलों के संरक्षण के लिए शोध व नई किस्मों को विकसित कर रहा है। विवि को रोम के इंटरनेशनल बायोडायवर्सिटी बोर्ड व ग्लोबल एनवॉयरमेंट फैसिलिटी (जेफ) से प्रोजेक्ट मिला है। वर्ष 2013 में विवि बनने के बाद शोधकार्य के लिए विवि को अन्तरराष्ट्रीय स्तर का पहला प्रोजेक्ट मिला है। साथ ही, प्रदेश में संचालित हो रहे पांच कृषि विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट हासिल करने वाली यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। शोध के लिए विवि को 30 हजार डॉलर यानि करीब 30-32 लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी मिली है। विवि चयनित जिलों में बाजरी, मूंग, मोठ, तिल, जीरा व अन्य स्थानीय स्तर की फसलों के संरक्षण को लेकर कार्य कर रहा है।
--
300 किस्मों पर प्रयोग, 12 का ट्रायल सफल
प्रोजेक्ट के तहत विवि ने चयनित जिलों में विभिन्न फसलों की करीब 300 किस्मों पर शोध किया, इनमें बेहतर परिणाम देने वाली 12 किस्मों को किसानों को ट्रायल के लिए उपलब्ध कराई गई, जिनके अच्छे परिणाम आए है। पांच वर्षीय प्रोजेक्ट के तहत विवि ने तीन साल पूरे कर लिए है।
------
विवि जोधपुर-बाड़मेर में कर रहा कार्य
इंटरनेशनल प्रोजेक्ट के तहत देश में 14 फसलों के संरक्षण व नई वैरायटी के विकास पर कार्य किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत विवि जोधपुर व बाड़मेर जिले में कार्य कर रहा है। जोधपुर जिले के ओसिया के गोविन्दपुरा व मानसागर गांव व बाड़मेर के चौहटन के धीरासर व धोख गांव में कार्य हो रहा है।
---
इतनी किस्मों पर किया शोध
फसल-- किस्में
बाजरा- 12
तिल- 85
मूंग- 65
मोठ- 140
--
प्रोजेक्ट के तहत चयनित फसलों पर शोध कार्य जारी है। अब तक हुए शोध में सकारात्मक परिणाम आए है।
प्रो बीआर चौधरी, कुलपति
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर
-----
देशी किस्मों पर जैविक तरीके से काम किया है। एक भी किस्म हाइब्रिड नहीं है। किसानों का इनके उपयोग से फायदा हुआ है।
बनवारीलाल शाह, परियोजना अधिकारी
जेफ
Published on:
23 Sept 2020 07:39 pm
