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गाजर के भाव औंधे मुंह गिरने से किसानों को रूलाया, खेत खाली करना हो रही है मजबूरी

मथानिया की लाल, सूर्ख, पतली, लम्बी व स्वाद मे मीठी गाजर के चलते देश की कोलकाता, मुम्बई, पूणे, चेन्नई, रायपुर और दिल्ली समेत पूरे देश की प्रमुख मंडियों मे गाजर की मांग रहती है।
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मथानिया/जोधपुर. मथानिया कृषि क्षेत्र मे गाजर की बम्पर पैदावार हुई है। लेकिन गाजर के बाजार भाव औंधे मुंह गिरने से किसानों की आर्थिक हालात पतली हो गई है। किसानों को बारदान खुदाई की मेहनत भी नहीं मिल रही है। मथानिया कृषि क्षेत्र के नेवरा, नेवरा रोड, रामपुरा, बिगमी, रीनिया, खारडा मेवासा, माण्डियाई, खुडियाला, किरमसरिया, बडला बासनी,थोब, बैठवासिया, बारा गगाड़ी, पांचला और घेवड़ा समेत तीन दर्जन से अधिक गांवों मे हजारों किसानों ने बड़े भू-भाग पर गाजर की बुआई तीन से चार चरणों में की है। मौसम की अनुकुलता के चलते पूरे क्षेत्र मे गाजर की बम्पर पैदावार हुई है। इस सीजन की मुख्य गाजर फसल अब चल रही है। मथानिया की लाल, सूर्ख, पतली, लम्बी व स्वाद मे मीठी गाजर के चलते देश की कोलकाता, मुम्बई, पूणे, चेन्नई, रायपुर और दिल्ली समेत पूरे देश की प्रमुख मंडियों मे गाजर की मांग रहती है।

मथानिया क्षेत्र के गांवों से प्रतिदिन 125 से 150 ट्रक गाजर विभिन्न मण्डियों तक रवाना होती है। लेकिन गाजर के निरन्तर बाजार भाव गिरने से किसानों की हालात पतली हो गई किसानों की आर्थिक सम्बल की प्रमुख फसल माने जाने वाली गाजर ने इस बार किसानों को रुला दिया है। इन दिनों गाजर बाजार भाव सिर्फ 3 से 5 रुपए प्रतिकिलो चल रहे हैं। जबकि गत वर्ष इन दिनों 13 से 17 रुपए मिल रहे थे। 3 से 5 रुपए भावों के चलते किसानों को खेतो से गाजर खुदाई, बारदान, धुलाई के बाद पैंकिंग ग्रेडिंग कार्य की मेहनत तक नहीं मिल रही है। गाजर का लागत मूल्य भी 9 से 10 रुपए आता है।

औंधे मुंह भावों के बावजूद भी किसान को गाजर के खेत खाली करना मजबूरी है। यहां के अधिकांश किसान गाजर की जमीन मे गेहूं बोते हैं। सुबह से देर रात्रि तक कडकड़़ाती सर्दी के बीच गाजर बेचना किसानों के लिए कठिन कार्य है। गाजर पैदावार प्रगतिशील किसान बाबूलाल परिहार ने बताया कि इस बार तो गाजर के भाव नहीं के बराबर है। किसानों को बारदाना, धुलाई व खुदाई के दाम भी नहीं मिल रही है। गाजर ने हजारों किसानों को रुलाकर रख दिया। गाजर के प्रमुख व्यापारी सांवर सेठ ने बताया कि इस बार गंगानगर जिले गाजर की बम्पर पैदावार के चलते यहां के किसानों को गाजर भाव नहीं मिल रहे है। देश की मंडियों मे हमेशा क्षमता से अधिक गाजर पहुंचती है।