राजस्थान के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक साल की फीस 70 हजार से ज्यादा, ये है एमसीए व एमबीए की फीस

पिछले साल प्रदेश के तकनीकी संस्थानों द्वारा अपने यहां कम फीस और अधिक खर्चे की शिकायतें राज्य सरकार को की गई। सरकार ने फीस निर्धारण के लिए जस्टिस पीके तिवारी समिति गठित की।

By: Harshwardhan bhati

Updated: 18 Feb 2020, 12:21 PM IST

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. राज्यस्तरीय शुल्क निर्धारण समिति ने प्रदेश के तकनीकी संस्थानों में वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में छात्रों द्वारा सालाना दिए जाने वाले शुल्क का निर्धारण कर दिया गया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतम फीस 77 हजार रुपए रखी गई है। इसमें शिक्षण और विकास शुल्क शामिल है। इसके अतिरिक्त किसी भी शुल्क को केपीटिशन शुल्क मानकर संबंधित संस्थान के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में केवल दो कॉलेज जोधपुर का जीत इंजीनियरिंग कॉलेज और जयपुर का स्वामी केशवानंद कॉलेज में 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वृद्धि की गई है। दोनों कॉलेज नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन (एनबीए) से मान्यता प्राप्त होने के कारण छात्रों से करीब 90 हजार रुपए वार्षिक ले सकेंगे। वर्ष 2020-21 में फीस निर्धारण के लिए सभी कॉलेज एक बार फिर से समिति के पास जाएंगे।

कॉलेजों की शिकायतों पर गठित हुई जस्टिस तिवारी समिति
पिछले साल प्रदेश के तकनीकी संस्थानों द्वारा अपने यहां कम फीस और अधिक खर्चे की शिकायतें राज्य सरकार को की गई। सरकार ने फीस निर्धारण के लिए जस्टिस पीके तिवारी समिति गठित की। तिवारी समिति ने शिकायतकर्ता कॉलेजों की जांच के बाद 53 इंजीनियरिंग कॉलेज, 25 एमबीएम कॉलेज, 11 एमसीए कॉलेज और दो बी.आर्क कॉलेज की फीस तय कर दी।

किसकी-कितनी फीस
समिति ने 53 इंजीनियरिंग कॉलेज की फीस उनके खर्चे के अनुसार तय की है। इसमें से 25 कॉलेजों की फीस 77 हजार रुपए सालाना और एक दर्जन कॉलेजों की 70 हजार रुपए सालाना है। सर्वाधिक कम फीस जयपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की 61000 रुपए है। प्रदेश में जयपुर स्थित आयोजना स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट और एपेक्स ग्रुप का स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट दो संस्थान ही ऐसे हैं जो बी.आर्क का कोर्स करवाते हैं। दोनों ही संस्थान 77000 रुपए सालाना लेंगे। एमबीए के लिए 25 कॉलेजों की फीस न्यूनतम 47826 से लेकर 60500 और एमसीए करवाने वाले 11 कॉलेज की फीस न्यूनतम 50 हजार से लेकर 60500 निर्धारित की गई है।

7500 कॉशन मनी, लौटानी होगी
सालाना शुल्क में शिक्षण शुल्क, विकास शुल्क, विवि द्वारा निर्धारित परीक्षा शुल्क, पंजीयन शुल्क इत्यादि शामिल है। इसके अलावा कॉलेज प्रत्येक छात्र से 7500 रुपए कॉशन मनी के तौर पर ले सकेंगे, जिसे साल के अंत में कॉलेज द्वारा छात्रों को वापस लौटाना होगा।

इनका कहना है
‘तकनीकी संस्थानों के विभिन्न पहलुओं के परीक्षण, विचार विमर्श एवं उनके गुणवत्तापरक कार्यक्रमों के अवलोकन के बाद शुल्क निर्धारित किया गया है। एनबीए से मान्यता प्राप्त दो तिहाई पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेज 20 फीसदी अधिक फीस ले सकेंगे।’
- डॉ. राकेश कोठारी, रजिस्ट्रार, जीत कॉलेज ऑफ इंस्टीट्यूशन्स

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