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दस दिन पहले पहुंच कुरजां ने दिए मौसम परिवर्तन के संकेत, जोधपुर में दिखा पहला जत्था

गत वर्ष मौसम तंत्र के गड़बड़ा जाने से यहां सर्दी का कोई खास असर नहीं देखा गया।

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फलोदी/जोधपुर. मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर खीचन आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां (डेमोसाइल क्रैन) ने क्षेत्र में दस्तक दे दी है। अपने मूल स्थानों पर बर्फबारी के कारण खड़ी हुई भोजन की विकट परिस्थितियों के चलते वहां से करीब 5500 किमी का सफर तय कर कुरजां माउण्ट एवरेस्ट को पार करते हुए मारवाड़ के जोधपुर क्षेत्र में पंहुची है। कुरजां के इस शीतकालीन प्रवास पर पंहुचने का समय के गत प्रवास से 10 दिन पूर्व पक्षी यहां पंहुचे हैं। अगर कुरजां के खींचन आने के पिछले आठ साल के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो इस बार कुरजां का शीतकालीन प्रवास आठ सालों में सबसे पहले शुरू होने जा रहा है।

कुरजां के यहां जल्द पंहुचने को वन्यजीव विशेषज्ञ मौसम परिवर्तन का संकेत मान रहे हैं। शनिवार सुबह जोधपुर के बासनी क्षेत्र में कुरजां बादलों के बीच आसमान में उड़ती हुई देखी, जहां से इकोलॉजी एण्ड रूरल डवलपमेंट के वन्यजीव प्रेमी भूपेन्द्रसिंह रावत ने तस्वीरें उपलब्ध करवाईं। हालांकि कुरजां का पहला जत्था जोधपुर में देखा गया है, लेकिन शनिवार रात तक खींचन नहीं पंहुचा था। कुरजां के जोधपुर पहुंचने की सूचना के बाद खींचन के पक्षी प्रेमी सेवाराम माली व केशवराज नागौरा आसमान की तरफ टकटकी लगाकर इंतजार करते नजर आए। खींचन में कुरजां के जल्द ही पंहुचने की संभावना है।

पिछले साल मौसम तंत्र में थी गड़बड़ी


गत वर्ष मौसम तंत्र के गड़बड़ा जाने से यहां सर्दी का कोई खास असर नहीं देखा गया। जिससे कुरजां की संख्या में काफी गिावट आई और 20-25 हजार पक्षियों की जगह यहां करीब 17 हजार के आसपास कही पक्षी दिखे। साथ ही यहां अधिकांश शीत ऋतु कुरजां की संख्या बेहद कमी रहीथी और वतन वापसी के मसमय ही करुरजां की संख्या में वृद्धि हुई थी।

इनका कहना है


इंसान की तुलना में पक्षी वातावरणीय संकेतों को पहले समझ लेते हैं तथा इस बार कुरजां का जोधपुर में प्रत्येक शीतकालीन प्रवास से 10 दिन पूर्व पहुंचना मौसम परिवर्तन की ओर इशारा करता है। मौसम के कारण पक्षियों का प्रवास चक्र भी प्रभावित होता है।


डॉ सुमित डाऊकिया, पक्षी विशेषज्ञ

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