
...तो फिर जोधपुर में कैसे रूकेगा मिलावट का कारोबार
के. आर. मुण्डियार
जोधपुर.
राज्य का दूसरे बड़ा शहर जोधपुर मिलावट के मामले में तो पूरे प्रदेश में सबसे आगे गिना जाता रहा है। लेकिन यहां खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजधानी जयपुर की तुलना में आधे भी नहीं है। ऐसे कई मौके आए, जब जयपुर की टीमों को यहां आकर मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां पर जयपुर की तुलना में स्थायी अधिकारी लगाने के प्रति ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि खान-पान के लिए मशहूर शहर जोधपुर जैसे शहर में मिलावट के खिलाफ वर्षभर अभियान व कार्रवाई जारी रहनी चाहिए, ताकि मिलावट के कारण किसी की सेहत खराब न हो सके। लेकिन पर्याप्त स्टाफ व खाद्य सुरक्षा अधिकारी पर्याप्त नहीं होने से खाद्य सामग्री के सैम्पल लेने की कार्रवाई केवल त्योहारों तक ही सीमित रहती है।
किसी भी शहर में खाद्य सामग्री के सैम्पल लेने की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही कर सकता है, लेकिन जोधपुर जिले में मात्र दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही तैनात है, जबकि राजधानी जयपुर में 9 खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात है।
स्वीकृत पदों से भी आधे-
जोधपुर में सीएमएचओ कार्यालय के अधीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 3 एवं जोन कार्यालय के अधीन 2 पद स्वीकृत है। कुल 5 पदों के विपरित जोधपुर में दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही तैनात है। दो में से एक अधिकारी तो आए दिन पूर्व के मामलों की केस स्टडी, कोर्ट पेशी आदि कार्यों में ही व्यस्त रह रहा है। ऐसे में नियमित रूप से खाद्य सामग्री के सैम्पल लेने की कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
शहर ------------खाद्य सुरक्षा अधिकारी ------------खाद्य विश्लेषक
जयपुर ------------9 ------------------------2
जोधपुर------------ 2 ------------------------1
नई लैब खुली वहां पर भी स्टाफ का संकट-
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन साल पहले स्वीकृत जालौर, बांसवाड़ा, चुरू व बीकानेर में खाद्य सुरक्षा स्वास्थ्य प्रयोगशाला का गत साल लोकार्पण कर दिया गया था। इन लैब में खाद्य विश्लेषक भी लगा दिए। लेकिन सरकार की ओर से अभी तक गजट नोटिफिकेशन नहीं किए जाने से खाद्य विश्लेषकों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सैम्पल की जांच का अधिकार नहीं है।
सेहत बिगडऩे के बाद आती है जांच रिपोर्ट-
जोधपुर शहर मेंं मिलावट की रोकथाम के लिए त्योहारों के मौके पर ही कार्रवाई अधिक हो रही है। दीपावली व होली से कुछ दिन पहले एवं त्योहार के मौके पर मिठाई, नमकीन या घी आदि खाद्य सामग्री के सैम्पल लिए जाते हैं, लेकिन इन सैम्पलों की रिपोर्ट त्योहार के 10-15 दिन बाद आती है। ऐसे में जिन दुकानों व मिठाई विक्रेताओं के यहां से सैम्पल लिए जाते हैं, वहां पर मिलावटी मिठाई व नमकीन या घी की बिक्री होती रहती है। और जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक मिलावट की सामग्री बाजार में खपा दी जाती है और लोग उस मिलावटी सामग्री को खा लेते हैं। जबकि विभाग की ओर से मिलावट का संदेह होने पर मिठाई या नमकीन आदि को नष्ट या पूरी सामग्री को सीज करने की प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जिस एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है, उसमें भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
Published on:
25 Mar 2019 12:16 am
