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विश्व मौसम दिवस : ग्लोबल वार्मिंग से थार के मौसम में हो रहे हैं ये बदलाव, जोधपुर में घटने लगे हैं धोरे

ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु में परिवर्तन, गर्मी में इजाफा, सर्दी हुई कम  

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जोधपुर . जलवायु में हो रहे बदलाव की वजह से भारत और पाकिस्तान में 4.46 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला थार मरुस्थल मैदानी इलाका बनने को अग्रसर है। पिछले सौ साल में थार के 12 जिलों में वार्षिक बरसात के औसत में 141.3 मिलीमीटर का इजाफा हुआ है। मानसूनी बरसात बढऩे से हरियाली तो बढ़ रही है, लेकिन बरसात के दिन घट गए हैं। चार महीने तक चलने वाली बरसात कई बार चार दिन में ही बरस जाती है।

वर्ष 2006 और 2010 में बाड़मेर, जैसलमेर , जोधपुर और बीकानेर में भारी बरसात हुई थी। 9 अगस्त 2016 को चौबीस घण्टे में ही जोधपुर में 194 मिमी पानी बरस गया। पिछले साल 2017 में जोधपुर में वार्षिक औसत से करीब दुगुनी यानी 630 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक प्रशांत महासागर में अल नीनो की परिस्थितियों की वजह से दक्षिणी-पश्चिमी मानसून और पश्चिमी विक्षोभों का पैटर्न बदल रहा है, जिससे कारण थार मरुस्थल की जलवायु में बदलाव आ रहा है।

थार मरुस्थल में प्रति किमी 83 व्यक्ति

मरुस्थल के स्थान पर 6.5 करोड़ वर्ष पहले टेथिस सागर हुआ करता था। पृथ्वी की उथल-पुथल से यहां मरुस्थल बन गया। यह विश्व का सबसे युवा और अधिक जैव विविधता वाला मरुस्थल है। भारत में थार मरुस्थल का हिस्सा करीब दो लाख वर्ग किलोमीटर है। इसका 61 फीसदी भाग राजस्थान के 12 जिलों में फैला हुआ है। यहां प्रति वर्ग किलोमीटर 83 व्यक्ति रहते हैं। यहां एक मात्र बरसाती नदी लूणी है। यहां सांप की 25 और छिपकली की 23 प्रजातियां हैं। ब्लैकबग, चिंकारा, लोमड़ी सहित अन्य जानवर हैं। इंदिरा गांधी नहर आने के बाद यहां हरियाली होने लगी। आद्र्रता बढऩे से बारिश भी बढ़ गई। हरियाली बढऩे से धूलभरी आंधियों के दिन कम होने लग गए। धोरे अब केवल बाड़मेर-जैसलमेर में ही दिखाई देते हैं, जबकि 50 साल पहले जोधपुर से धोरों की शुरुआत हुआ करती थी।

मरुस्थल में एक दिन में 100 मिमी से अधिक पानी


बाड़मेर-जैसलमेर इलाके में वार्षिक बरसात का औसत 50 मिमी है, लेकिन अब कहीं अधिक बरसात हो रही है। मौसम में बदलाव की वजह से ही वर्ष 2006 में बाड़मेर और जैसलमेर में भयंकर बारिश हुई थी, जिसकी वजह से 138 लोग मारे गए। इस दरम्यान 2160 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

वर्ष 2006 की असमान बारिश

स्थान -----तारीख----बरसात मिमी में


जैसलमेर -----6 अगस्त ----- 130

लोडिय़ा ----- 12 अगस्त ----- 160
दांता ----- 20 अगस्त -----260

जैसलमेर -----21 अगस्त -----140
बाड़मेर -----22 अगस्त -----160

100 साल में तापमान में वृद्धि

बरसात के साथ थार मरुस्थल के औसत तापमान में भी वृद्धि होती जा रही है। इसकी वजह से सर्दियों के दिन कम हो रहे हैं।


स्थान ----- तापमान में वृद्धि

जोधपुर ----- 2.8 डिग्री
जैसलमेर ----- 3.6 डिग्री

बीकानेर ----- 3.8 डिग्री
पाली ----- 2.3 डिग्री

जलवायु में बदलाव, शोध की जरुरत

पूरे विश्व की जलवायु में बदलाव हो रहे हैं। थार भी इससे अछूता नहीं है। थार में बरसात का पैटर्न बदल गया है। यहां जैव विविधता बढ़ गई है। नए पौधे और जंतु पारिस्थितिकी में प्रवेश कर चुके हैं। मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर बड़े शोध की जरुरत है।


- डॉ. एलएन हर्ष, पूर्व कुलपति, मण्डोर कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर