
गजेंद्र सिंह दहिया
Rajasthan News: जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग के एक शोध में आयुर्वेदिक पौधे हरड़ (टर्मिनलिया चेबुला) से कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में सफलता मिली है। विवि के शोधकर्ताओं ने इसके लिए हरड़ के जंगली फल का हाइड्रो-अल्कोहलिक अर्क तैयार किया। फिर इसे टार्गेटेड ड्रग डिलिवरी के जरिए कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाकर उनका खात्मा किया। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल नेचुरल प्रोडक्ट्स में प्रकाशित हुआ है। हरड़ के जंगली फल को आयुर्वेद में ‘औषधियों की जननी’ और भारत, भूटान और तिब्बती में ‘चिकित्सा का राजा’ माना जाता है। इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेटिव, एंटी डायबेटिक, एंटी-कार्सिनोजेनिक और एंटी-म्यूटाजेनिक प्रभाव होते हैं। हरड़ पाचन गुणों के कारण त्रिफला जैसी हर्बल औषधि में काम आता है। यह पौधा पाकिस्तान, नेपाल, चीन, श्रीलंका में भी मिलता है।
जेएनवीयू के वनस्पति शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. जीएस शेखावत और डॉ. श्वेता गुप्ता (पोस्ट डाक्टरल फेलो) ने संयुक्त रूप से यह शोध किया है। शोधकर्ताओं ने हरड़ के फल का हाइड्रो अल्कोहलिक अर्क तैयार कर इसके एंटी इन्फ्लेमेशन और एंटी-ऑक्सीडेटिव क्षमता की जांच की। इस दवाई को कैंसर कोशिकाओं तक एक्सोसोम में लोड करके पहुंचाया। एक्सोसोम, लिपिड बाइलेयर युक्त बाह्यकोशिकीय वेसिकल्स हैं, जो अपने बहुत से फायदे के लिए ड्रग-डिलीवरी के एजेंट के रूप में काम में लिए जा रहे हैं। इससे दवाई ने केवल कैंसर से प्रभावित कोशिकाओं पर ही प्रहार किया।
शोध में पता चला कि हरड़ के जंगली फल के हाइड्रो अल्कोहलिक अर्क में हेपेटो-सेल्यूलर कार्सिनोमा यानी कैंसर जैसी घातक बीमारी को रोकने की अतुलनीय क्षमता है।
हमने हरड़ के एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण को स्थापित किया है।
Updated on:
12 Jun 2024 11:11 am
Published on:
12 Jun 2024 09:54 am
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