
Govardhan Pond, becoming the second Ganglav of Jodhpur
बरसों पहले जहां तालाब की माटी लक्ष्मी स्वरूप मानी जाती थी, वहां आज गटर का पानी डाला जा रहा है
जोधपुर . एक तरफ जहां गर्मी में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। वहीं हमारा नगर निगम प्रशासन तालाबों के रखरखाव के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है। भीतरी शहर में चांदपोल स्थित गोवर्धन तालाब दूसरा गंगलाव बनने जा रहा है। आसपास के रहवासीय इलाकों में सीवरेज लाइन नहीं होने के कारण लोग अपने घरों का सीवरेज गोवर्धन तालाब में छोड़ रहे हैं। जबकि गंगलाव व गोवर्धन तालाब की आपस में दूरी भी दो-ढाई किलोमीटर से ज्यादा नहीं है। कुछ बरसों पहले धनतेरस पर भीतरी शहर की महिलाएं इसी तालाब की माटी लेकर घर में लक्ष्मी स्वरूप के रूप में पूजन करती थीं। उस जगह पर आज आसपास के लोग अपने सीवरेज का पानी छोड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम व पार्षद से कई बार गुहार लगाने के बावजूद उनके क्षेत्र में सीवरेज लाइन नहीं डाली गई है। क्षेत्र में गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का अंदेशा बना हुआ है।
पुख्ता इंतजाम नहीं, लोग जंगलों में जाते है शौच
गोवर्धन तालाब के आसपास करीब पचास-साठ रहवासीय इलाके हैं, जो बरसों से यहां रह रहे हैं। किसी जमाने में यहां लोग शौच के लिए जंगल में जाते थे। उसके बाद कुछ लोगों ने अपने घरों में सरकार के आह्वान पर शौच स्थापित कर दिए। पुख्ता सीवरेज लाइन न होने के कारण कई बार घर के सॉकिट जाम हो जाते हैं। इस कारण कई पढ़े-लिखे महिला पुरुष जंगलों में शौच जाते हैं। यह नजारा भी शहर के लिए शर्मनाक है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक इन क्षेत्रों में पट्टों के लिए नगर निगम से सर्वे हो चुका है, लेकिन पट्टे आवंटित नहीं हुए हैं।
नगर निगम व पार्षद को कोस रहे लोग
नगर निगम शहर में करोड़ों रुपयों की योजना चला कर सभी जगह सीवरेज से जोडऩे का प्लान बना रहा है, लेकिन गोवर्धन तालाब को देख कर इन योजनाओं की परतें खुल जाती हैं। क्षेत्रवासियों ने कहा कि क्षेत्रीय पार्षद इस मामले में किसी तरह से कोई रुचि नहीं लेती हैं, अगर वे रुचि लेंगी तो काम जल्द हो जाएगा। पत्रिका टीम के पहुंचने पर लोगों में जोश भर गया। सभी ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की।
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यहां की माटी लक्ष्मी मानी जाती थी
सालों पहले भीतरी शहर की महिलाएं चांदपोल के गोवर्धन तालाब की माटी धनतेरस को लेने आती थीं। यहां की माटी को लक्ष्मी मान उसकी पूजा-अर्चना होती थी। वर्तमान में तालाब में मलबा फेल चुका है। अब लोग गोवर्धन तालाब से मुंह मोडऩे लगे हैं। अब हर साल धनतेरस पर महिलाएं आगे बने हनुमानगढ़ की माटी को लक्ष्मी स्वरूप मान कर घर ले जाती हैं।
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इनका कहना है
यहां एक भी घर में सीवरेज लाइन नहीं है। भयंकर गंदगी रहती है। यहां कोई सफाईकर्मी तक नहीं आता है। हमारी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। - दमयंती शर्मा, क्षेत्रवासी--
यह जगह नरक से कम नहीं है। लोगों के घरों में शौच जाम होने लगे हैं। बारिश में हालत खराब हो जाती है। हम पार्षद को समस्या बता कर थक चुके हैं।
- गोविंद, क्षेत्रवासी
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पार्षद का कहना है
इस क्षेत्र में केवल एक गली रह गई है। मैंने जेईएन को बुला कर क्षेत्र दिखवाया है। नगर निगम में 65 लाख का बजट आएगा, उस समय यहां भी सीवरेज का कार्य होगा।- गीतादेवी, पार्षद, वार्ड संख्या 13
Published on:
19 May 2018 04:58 pm
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