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जागो सरकार : मिड डे मील व दूध योजना का भुगतान करने के बाद अब बिजली का बिल भरना भी शिक्षकों के जिम्मे

प्रारंभिक शिक्षा विभाग की राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों को वार्षिक 25 हजार और माध्यमिक सेटअप की राजकीय माध्यमिक व राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों को 50 हजार रुपए सालाना देय होते हैं। इस राशि का 10 फीसदी हिस्सा स्वच्छता पर खर्च होता है।
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government teachers are paying bills of electricity and Mid day meal

जागो सरकार : मिड डे मील व दूध योजना का भुगतान करने के बाद अब बिजली का बिल भरना भी शिक्षकों के जिम्मे

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. अक्सर सरकारी स्कूलों में मिड डे मील का भुगतान अटकता है तो कभी अन्नपूर्णा दूध योजना के पैसे बराबर नहीं आते। इस बीच बाजार से कभी कर्जा लेकर तो कभी जेब से पैसे खर्च कर संस्था प्रधान और शिक्षक सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करते हंै। अब जिले की सवा तीन हजार प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों को समग्र शिक्षा अभियान में मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट का पैसा अटक जाने से बिजली का बकाया बिल भी गुरुजनों के माथे आ गया है।

संकट यह है कि बिल नहीं भरा तो स्कूलों का बिजली कनेक्शन कट सकता है। कंपोजिट ग्रांट का फंड संस्था प्रधान के खाते में आता है। आम तौर पर ये राशि मई में स्कूल के प्रथम सत्र या जुलाई माह तक मिल जानी चाहिए, लेकिन राशि जारी कर देने के अधिकारियों के दावे के बावजूद यह ग्रांट अब भी कई स्कूलों के खाते में नहीं आई है।

इतनी मिलती है राशि
प्रारंभिक शिक्षा विभाग की राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों को वार्षिक 25 हजार और माध्यमिक सेटअप की राजकीय माध्यमिक व राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों को 50 हजार रुपए सालाना देय होते हैं। इस राशि का 10 फीसदी हिस्सा स्वच्छता पर खर्च होता है। ये राशि छात्रों के नामांकन के आधार पर बढ़ती भी है। इसी राशि से स्कूल की स्टेशनरी, बिजली बिल और इलेक्ट्रिक सामान का खर्च निकलता है।

घर से बड़ी स्कूल की जिम्मेदारी
संस्था प्रधानों की पीड़ा है कि कभी मिड डे मील का भुगतान समय पर नहीं होता तो कभी अन्नपूर्णा दूध योजना का। स्कूल कंपोजिट ग्रांट की राशि अभी तक खाते में संस्था प्रधानों के नहीं आई है। शादी-ब्याह की सीजन में घरेलू व सामाजिक खर्चें करें या फिर स्कूल का खर्च चलाए। हमेशा कह दिया जाता है कि ब्लॉकों को आदेश दे दिए। अधिकारियों को पूरी ग्राउंड रिपोर्ट लेनी चाहिए।
-लक्ष्मण दान चारण, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ

इनका कहना है
ब्लॉक को हमने स्कूल कंपोजिट ग्रांट कभी भेज दी। अब ब्लॉकों से ये राशि स्कूलों में पहुंचेगी। किसी को दिक्कत आ रही है तो संभाग मुख्यालय पर संपर्क कर सकते हैं।
- प्रेमचंद सांखला, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जोधपुर मंडल