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पशु मेलों के लिए चिह्नित स्थानों की उपयोगिता परखेगी सरकार

हाईकोर्ट में सरकार ने कहा, बकरीद पर पशुओं की बिक्री को पशु मेलों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता  
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पशु मेलों के लिए चिह्नित स्थानों की उपयोगिता परखेगी सरकार

पशु मेलों के लिए चिह्नित स्थानों की उपयोगिता परखेगी सरकार

जोधपुर. ईद उल अजहा (Id Ul Azha) पर उम्मेद स्टेडियम (Ummed Stadium) के चारों तरफ भेड़-बकरों की खरीद-फरोख्त के लिए कथित अवैध पशु मेले (Illegal animal fairs) रोकने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) मेंं दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को राज्य सरकार (State Govt.) ने कहा कि इसे पशु मेलों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस अवधि में आमजन को असुविधा से बचाने के लिए यातायात प्रबंधन किया जा सकता है। कोर्ट ने इस याचिका को अब पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका के साथ सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में पुरुषोत्तम अग्रवाल की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता महेन्द्रसिंह सिंघवी ने कहा कि कोर्ट के आदेश की पालना में नगर निगम ने जोधपुर में पशु मेलों के लिए चार स्थानों पर भूमि चिह्नित की है। सरकार उपयोगिता के लिहाज से इन स्थानों का परीक्षण कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां तक बकरीद के दौरान भेड़-बकरों की बिक्री का सवाल है, यह सीमित अवधि तक ही होती है। इस अवधि में बेहतर यातायात प्रबंधन किया जा सकता है, इसलिए सीमित अवधि के लिए इन्हें मौजूदा स्थानों पर ही अनुज्ञेय किया जाए। याची के अधिवक्ता मोतीसिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने ही अपने आदेश में कहा है कि भविष्य में पशु मंडी या मेला और इस तरह की कोई भी गतिविधि किसी भी सूरत में आम जनता के लिए उपयोग के लिए निश्चित सड़कों, गलियों, हाईवे, सार्वजनिक तथा खुले क्षेत्र में आयोजित नहीं की जा सकती। अधिवक्ता ने कहा कि वर्ष 2013 में अधिसूचित जोधपुर के मास्टर प्लान में चौखा में बकरा मंडी के लिए अलग से भूमि आरक्षित की गई है। यह भूमि नगर निगम सीमा से बाहर स्थित है, लेकिन अब तक बकरा मंडी को वहां पर शिफ्ट नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बकरीद के मौके पर हर साल आखलिया चौराहा व ओल्ड स्टेडियम के पास हजारों की संख्या में भेड़-बकरों की बिक्री होती है, जिसके लिए संबंधित प्राधिकारी द्वारा कोई अनुमति नहीं ली जाती।

महाधिवक्ता ने कहा कि बकरीद पर सीमित अवधि के लिए ही ऐसी गतिविधि होती है। अन्य त्यौहारों गणेश चतुर्थी, बाबा रामदेव मेला, नवरात्रा व अन्य मेलों के दौरान भी सडक़ों के किनारे शामियाने लगाए जाते हैं। दीपावली व अन्य त्यौहारों के दौरान दुकानदार सडक़ों के आगे और बरामदों-फुटपाथों में भी सामान की बिक्री के लिए स्टॉल लगाते हैं। जोधपुर ही नहीं, देश के समस्त हिस्सों में ऐसा कई मौकों पर होता है। मुख्य मुद्दा आमजन को असुविधा से बचाने का है, जिसमें मुख्य भूमिका यातायात प्रबंधन की है। इस संबंध में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका अलग से विचाराधीन है। कोर्ट के इस याचिका को भी उसके साथ ही सूचीबद्ध करने के आदेश दिए। हालांकि, याची के अधिवक्ता ने कहा कि यह गतिविधि पशु मेलों की श्रेणी में ही आती है और इस पर अन्य नियम कायदे भी लागू होते हैं।