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बॉर्डर पर छाएगी हरियाली, जवानों के लिए बनेंगे शेल्टर बेल्ट
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बॉर्डर पर छाएगी हरियाली, जवानों के लिए बनेंगे शेल्टर बेल्ट

- फल-सब्जी व दूध का भी होगा इंतजाम - काजरी की तकनीक से बेर, अनार, अमरूद और खजूर से आबाद होंगे धोरे
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जोधपुर. भारत-पाकि स्तान बॉर्डर पर 1965 और 1971 की जंग में जहां तोपों व टैंकों की आवाज से धरती थर्राती थी वहां अब हरियाली की उम्मीद नजर आ रही है। धोरों पर बेर, अनार, अमरूद और खजूर के पौधे लहलहाएंगे। रेडक्लिफ लाइन के पास तैनात जवानों को वहीं पर फल-सब्जियां आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के मध्य हुई वार्ता के बाद काजरी ने बॉर्डर के लिए तकनीक उपलब्ध करवाने की बात कही है। इसकी शुरुआत जवानों के लिए शेल्टर बेल्ट से होगी।

बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के महानिरीक्षक अनिल पालीवाल अपने अधिकारियों संग कुछ दिनों पहले काजरी पहुंचे। उन्होंने काजरी की विभिन्न मरुस्थलीय तकनीक का बारीकी से अवलोकन करने के बाद काजरी को अपनी जरूरतें बताई। काजरी ने सबसे पहले बॉर्डर आउट पोस्ट पर पौधरोपण के लिए शेल्टर होम बनाने का सुझाव दिया है। इसके अंतर्गत खेजड़ी, केर, कुमट, नीम जैसे पौधे पवन की दिशा के अनुसार लगाए जाएंगे। इससे बालू मिट्टी का स्थिरीकरण होने के साथ गर्मियों में अपेक्षाकृत कम तापमान में फौजी ड्यूटी कर सकेंगे।


जवानों की यूनिट में हॉर्टिकल्चर पौधे
बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ जवानों के लिए खाने-पीने की सामग्री उपलब्ध करवाना भी एक चुनौती होती है। काजरी ने बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ की प्रत्येक यूनिट के लिए हॉर्टिकल्चर के 10 से 15 पौधे लगाने का सुझाव दिया है ताकि संबंधित यूनिट को फल-सब्जी उसकी यूनिट में ही मिल सकेगी।

दूध के लिए 7 तरह की घास

भारत-पाक बॉर्डर पर दूर-दूर तक कुछ भी खाने को नहीं मिलता। जिसकी वजह से गाय, भैंस व बकरी जैसे दुधारु मवेशी पालने में भी मुश्किल आती है। काजरी सेवण, धामण, हाथी घास, अंजन सहित सात प्रकार से अधिक तरह की घास उगाने की तकनीक जानती है। जिससे थारपारकर गाय, शेखावटी बकरी व भैंस पाली जा सकती है। इससे जवानों की दूध की समस्या दूर हो जाएगी।

बीएसएफ को देंगे तकनीक
बीएसएफ ने अपनी जरूरतों के अनुसार हमसे तकनीक व सहायता मांगी है। काजरी बॉर्डर शेल्टर बेल्ट सहित विभिन्न तकनीक देने को तैयार है।

डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर