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मानसून की बेरुखी से दस साल पुराने ट्रेक पर ग्वार, भाव 7 हजार के पार

- मानसून ने दिया दगा, उत्पादन प्रभावित होने की आशंका- वायदा कारोबार में उछाल, विशेषज्ञों का दावा- चौपट हो जाएगी इंडस्ट्री
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मानसून की बेरुखी से दस साल पुराने ट्रेक पर ग्वार, भाव 7 हजार के पार

मानसून की बेरुखी से दस साल पुराने ट्रेक पर ग्वार, भाव 7 हजार के पार

अमित दवे/जोधपुर। देशभर में ग्वार और गम एक बार फिर दस साल पुराने ट्रेक पर है। मानसून की बेरुखी के कारण ग्वार व गम दोनों के ही भाव बढ़ रहे हैं। वहीं वायदा कारोबार में तेजी के कारण ग्वारगम में जबरदस्त उछाल आया है और भाव १० हजार रुपए प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए है। विशेषज्ञ बिना मांग ग्वार के भावों में लगी आग का कारण मानसून व अकाल की स्थिति को बता रहे है। बारिश कम होने के फसल को नुकसान हुआ है। इस बार ग्वार के ३०-३५ लाख बोरी उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है, पिछले वर्ष करीब ६० लाख बोरी उत्पादन हुआ था।

२०११ में ग्वार के भाव ३२ हजार व गम के भाव १ लाख तक हुए
वर्ष २०११-१२ में ग्वार के भाव ३२ हजार रुपए और गम के भाव १ लाख रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। उस समय विदेशों में डिमाण्ड काफी बढ़ गई थी और बड़े स्तर पर सट्टे हुए थे। इसके बाद ग्वार के भावों में गिरावट आना शुरू हो गई थी। अब करीब १० साल बाद भावों में तेजी आने से व्यापारियों व जमींदार किसानों के चेहरों पर रौनक है, जिनके गोदामों में पिछले साल का स्टॉक पड़ा है। भारत से ग्वार चीन, अमरीका, रुस, जापान आदि देशों को निर्यात हो रहा है। वर्तमान में निर्यात लगभग बंद है।

किसानों का रुख ग्वार की जगह मूंगफली-कपास की ओर
इस बार किसानों ने अपने खेतों में ग्वार की बिंजाई में रुचि नहीं दिखाई। किसानों का रुख मूंग-मूंगफली व कपास की बिंजाई की ओर ज्यादा रहा। इस बार हरियाणा-पंजाब, गंगानगर व आसपास के क्षेत्रों में नहरी क्षेत्र होने के बावजूद ग्वार की बिंजाई पिछले वर्ष की तुलना में आधी हुई। वहीं प्रदेश में पश्चिमी राजस्थान में ग्वार उत्पादक प्रमुख बाडमेर, जैसलमेर व बीकानेर में भी मूंग, मूंगफली व कपास की बुवाई ज्यादा हुई।

वायदा कारोबार ग्वारगम इंडस्ट्री को चौपट कर देगी। ग्वार व गम में तेजी-मंदी का खेल कई व्यापारियों-किसानों को बर्बाद कर देगा। सटोरिया के हाथ में भाव होंगे।
भंवरलाल भूतड़ा, संरक्षक
राजस्थान ग्वार दाल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन, जोधपुर


ग्वार व गम के भाव सटोरियों के हाथों में है, एेसे में आगे नए भाव बनेंगे और टूटेंगे। इस तेजी का कारण मानसून है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए अभी बारिश की जरुरत है, तभी कुल उत्पादन का आंकलन हो पाएगा।
प्रकाशचंद मेहता, अध्यक्ष
बासनी कृषि उपज मंड़ी व्यापार संघ


आगामी दिनों में दो अच्छी बारिश हो गई तो ग्वार का उत्पादन ३५-४० लाख बोरी हो सकता है। अन्यथा १५-२० लाख बोरी रहेगा। इससे निर्यात कारोबार प्रभावित होगा।
श्रवण सारस्वत, ब्रोकर

कम सिंचाई व प्रतिकूल मौसम में उत्पादन देने वाली ग्वार की फ सल के लंबे समय से बाजार भाव नीचे रहने से किसानों का रुझान घटा था। अब तेजी आने से किसानों का ग्वार की ओर रुझान बढ़ेगा।
तुलछाराम सिंवर, प्रांत प्रचार प्रमुख
भारतीय किसान संघ
जोधपुर प्रांत

ग्वार बुवाई लक्ष्य व बुवाई (हैक्टेयर में)
जिला-- बुवाई लक्ष्य-- बुवाई
जोधपुर-- 135000-- 136000
जालौर-- 45000-- 25000
जैसलमेर-- 470000-- 355000
बाड़मेर-- 270000-- 160000