
मेहमान परिन्दों अब रूको, मत जाओ ....
जोधपुर. एक माह पूर्व जोधपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में एवियन इन्फ्लूएंजा ( बर्ड फ्लू ) से लगातार पक्षियों की मौत से चिंतित पक्षी वैज्ञानिक और पर्यावरण प्रेमी एक माह पूर्व थार में शीतकाल प्रवास पर आने वाले मेहमान प्रवासी परिन्दों के लिए रूको मत, जाओ की प्रार्थना कर रहे थे वे अब मेहमान पक्षियों के लिए रूको, मत जाओ की कामना कर रहे है। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि जोधपुर जिले में बर्ड फ्लू का खतरा अब न के बराबर रह गया हैं । ऐसे में फरवरी के प्रथम सप्ताह से गंतव्य की और लौटने वाले पक्षियों के लिए कम ही समय बचा है।
प्रवास के अंतिम दौर में गिद्ध थार के
जोधपुर, जैसलमेर ,बीकानेर तक बड़ी संख्या में पहुंचे गिद्ध अपने प्रवास के अंतिम दौर में हैं । विशेष बात तो यह है कि बर्ड फ्लू के बावजूद कौए और अन्य मृतभक्षी पक्षी भी बहुतायात में डेरा डाले हैं । आगोलाई,दुग्गड़ ,पोखरण आदि क्षेत्रों में मृत मवेशियों को अपना भोजन बनाते सहज देखा जा सकता हैं । पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ शरद पुरोहित ने बताया कि फरवरी के मध्य से गिद्धों की वापसी का दौर शुरू हो जाएगा। फिलहाल युरोशियन ग्रिफान,हिमालयन ग्रिफान,इजिप्शियन वल्चर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है। .इन सभी में जटायु का वंशज कहे जाने वाले सबसे विशाल वल्चर सिनेरियस जोधपुर के लगभग सभी पुराने जगहों पर विचरण करते नजर आ रहे है। सिनेरियस ग्रिफॉन गिद्धों की संख्या पिछले कई सालों बाद दिसम्बर माह बढ़ी है। इसका कारण कई स्थानों पर बरसाती जल के नाडी ,तालाबों में पानी का स्तर कम होना है।
गिद्धों को इनसे परेशानी
लगातार खनन व पेड़ो की कटाई
प्राकृतवास क्षेत्रों में हिंसक श्वानों व अन्य जीवों का शिकार बन जाना
पेड़ों की कटाई - छंगाई में अंडों का गिरना ।
थार के रेगिस्तानी इलाकों से अकाल के दौरान मवेशियों का पलायन कर जाना ।
Updated on:
31 Jan 2021 10:52 am
Published on:
31 Jan 2021 10:52 am
