
जोधपुर.
रोशनी के त्योहार दीपावली पर खुशियां मनाने के पटाखे भले ही फोड़ें, लेकिन पटाखे जलाते या फोड़ते समय सावधानी बेहद जरूरी हैं, अन्यथा थोड़ी सी भी असावधानी हमें नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अधिक मात्रा में पटाखे जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ेगा। जिससे अस्थमा या श्वांस संबंधी रोगियों को पटाखों के धुएं से काफी परेशानी हो सकती है। ऐसे में हमें हमारी खुशियों के साथ दूसरों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए दीपावली मनानी चाहिए। यह सावधानी इसलिए बता रहे हैं कि क्योंकि हर साल जोधपुर शहर के अस्पतालों में दीपावली या उसके अगले दिन पटाखों से हाथ-पांव-मुंह जल जाने, आंखों व हाथ को चोट लगने, घबराहट, सांस फूलने जैसे कई मरीज अचानक बढ़ जाते हैं।
यह बरतें सावधानियां-
-आकाश में उडऩे वाले तीर इत्यादि नहीं छोड़े। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में इससे आग लगने का खतरा अधिक रहता है।
-अस्पतालों के आस-पास पटाखें कम जलाएं और ज्यादा तेज आवाज के पटाखे नहीं फोड़े। ऐसे पटाखे न केवल प्रदूषण फैलाते हैं बल्कि मरीजों के आराम में बाधा पैदा करेंगे।
-रास्तों पर पटाखे फोड़ते समय राह गुजरने वाले या वाहनों का विशेष ध्यान रखें, तेज आवाज से किसी का ध्यान भंग होकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है।
-तेज आवाज के पटाखों से मवेशी बिदक सकते हैं। जिससे भी चोट लगने की आशंका रहती है।
-पटाखों से निकलने वाले रासायनिक व जहरीला धुआं किसी का भी स्वास्थ्य बिगाड़ सकता है।
-पटाखों से जल जाने पर तत्काल निकटत्तम अस्पताल में चिकित्सक को दिखाएं।
-गर्भवती महिलाएं पटाखों की तेज आवाज से दूर रहें। आवाज व प्रदूषण से उसकी तबीयत खराब हो सकती है।
-जिन लोगों को धूल-मिट्टी से एलर्जी हैं, वे लोग पटाखों जलाने की जगह नहीं जाएं।
अस्थमा, श्वांस रोगी पटाखों से दूर रहें-
दीपावली बहुत अच्छा त्योहार हैं। सभी खुशियां मनाएं, लेकिन अस्थमा, श्वासं व हृदय, एलर्जी के रोगी धुएं व प्रदूषण से बचकर रहें। कोशिश यह हो कि पटाखे अवॉइड करें या फिर कम पटाखे ही जलाएं। मां-बाप अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। पटाखे निर्धारित दूरी पर खड़े रहकर जलाएं। किसी भी तरह की चोट लगने या जल जाने पर तत्काल निकटतम चिकित्सालय में चिकित्सक को दिखाएं।
-डॉ. नवीन किशोरिया, विशेषज्ञ, मेडिसिन
निर्धारित दूरी से ही जलाएं पटाखे-
सभी हंसी-खुशी दीपावली मनाएं और यह खुशियां बनी रहें, इसलिए हमें पटाखे जलाते समय पूरी सतर्कता रखनी हैं। यह ध्यान रखना चाहिए कि पटाखों से चमड़ी जल जाने पर पहले जैसी सुन्दरता कभी नहीं आती। निर्धारित दूरी से ही पटाखे जलाएं जाएं। आंखों पर चश्मा जरूर रखें और बच्चे अकेले में पटाखे कतई नहीं फोड़े। पटाखों से निकलने वाले पावडर छू जाने पर हाथों को अच्छे से धोने चाहिए, अन्यथा मुंह या शरीर के किसी जगह हाथ लगने पर चमड़ी खराब हो सकती है।
-डॉ. दिलीप कच्छावाहा, चर्म रोग विशेषज्ञ
फट सकते हैं बच्चों के कान के पर्दे-
पटाखों की तेज आवाज से छोटे बच्चों के कान के पर्दे फट सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो, पटाखे कम ही जलाएं। पटाखों से निकलने वाले धुआं बच्चों की आंखों की रोशनी प्रभावित कर सकता है। इसलिए बड़ों की निगरानी में ही बच्चों को पटाखे जलाने दिए जाएं। पटाखों से आग लगने का डर भी रहता है। इसलिए हर जगह सावधानी बेहद जरूरी है। खुशियां जरूर मनाए, लेकिन दूसरों को परेशानी में डालकर खुशियां मनाना कतई ठीक नहीं।
-डॉ. रामकिशोर विश्नोई, शिशु रोग विशेषज्ञ
आंख पर चोट लगने पर तत्काल अस्पताल आएं-
दिवाली के मौके पर सबसे अधिक मरीज पटाखों से आंख में चोट लगने के आते हैं। इसलिए खुशियों के त्योहार पर पटाखे जलाते समय पूरी सावधानी बरतें। अनार, फुलझड़ी, चकरी, कोटे आदि से आंखों में चोट लग जाती है। इसलिए ऐसे पटाखे निर्धारित दूरी व चश्मा पहनकर ही जलाएं। खासकर बच्चों को अकेले में पटाखे नहीं जलाने दें। आंख पर चोट लगने पर घर पर कोई उपचार नहीं करें। पानी से धोने के बाद तुरंत नजदीक के अस्पताल मेंं लेकर जाएं। एमडीएम अस्पताल में इमरजेंसी में 24 ही घंटे वरिष्ठ चिकित्सक व रेजीडेंट्स की ड्यूटी सुनिश्चित रहेगी।
-डॉ. अरविन्द चौहान, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग, एसएन मेडिकल कॉलेज जोधपुर
Published on:
06 Nov 2018 10:42 pm
