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एलिजा टेस्ट की आड़ में डेंगू के आंकड़े छुपा रहा स्वास्थ्य विभाग

इंडेफ्थ स्टोरी
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एलिजा टेस्ट की आड़ में डेंगू के आंकड़े छुपा रहा स्वास्थ्य विभाग

एलिजा टेस्ट की आड़ में डेंगू के आंकड़े छुपा रहा स्वास्थ्य विभाग

जोधपुर. जोधपुर में इस साल अधिकारिक तौर पर साढ़े चार सौ से अधिक लोग डेंगू की चपेट में आए हैं। लेकिन कार्ड टेस्ट के बाद 10 हजार से अधिक लोगों को डेंगू पीडि़त माना गया। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज सहित अन्य सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों में कार्ड टेस्ट में मरीज पॉजिटिव आने पर ही डेंगू रोगी मान ही उपचार दिया जा रहा है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कार्ड टेस्ट से पॉजिटिव को सरकारी रिकार्ड में डेंगू रोगी नहीं माना जा रहा।
स्वास्थ्य विभाग केवल एलिजा टेस्ट को ही मान्यता देता है। जबकि शहर में ज्यादातर जगहों पर कार्ड टेस्ट किए जा रहे हैं। सच्चाई ये है कि एलिजा टेस्ट से पहले से कार्ड के जरिए डेंगू डिटेक्ट किया जाता रहा है। एलिजा टेस्ट बहुत कम मरीजों का किया जा रहा है। कार्ड टेस्ट की अच्छी बात यह है कि बुखार के दूसरे तीसरे दिन ही डेंगू वायरस को कन्फ र्म कर देता है। जबकि एलिजा टेस्ट पांचवे दिन पॉजिटिव बता पाता है। इस वजह से डॉक्टर कार्ड टेस्ट को मरीजों के हित में बताते हैं। पांचवे दिन तक फ ीवर की पहचान होने तक कई बार मरीज की हालत बिगडऩे का भी खतरा रहता है। इसके बावजूद एलिजा टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद ही डेंगू मरीज आना रिकार्ड में दर्ज किया जा रहा है।

उल्लेखनीय हैं कि इस बीमारी में चिकित्सक पॅरासिटामॉल टेबलेट देकर मरीज का बुखार सही करते हैं और प्लेटलेट्स को कंट्रोल रख इलाज करते हैं। इस दौरान मरीज को खूब लिक्विड देने की सलाह दी जाती है।

इन टेस्ट को ऐसे समझिए

एलिजा टेस्ट-ये एक ब्लड टेस्ट है। इसमें एंटीजन और एंटीबॉडी दोनों होते हैं। टेस्ट फ ीवर के 5वें दिन बताता है कि मरीज को नॉर्मल फ ीवर है या फि र डेंगू फीवर है। इस टेस्ट के रिजल्ट अच्छे हैं।

कार्ड टेस्ट

यह भी ब्लड टेस्ट है। इसकी खास बात यह है कि बुखार आने के दो दिन में ही वायरस को कन्फ र्म कर देता है। एंटीजन टेस्ट बुखार के शुरुआती 1 से 3 दिन के मध्य कराना है तो एनएस-1 टेस्ट करवा सकते हैं। आइजीएम व आइजीजी में केवल आइजीजी पॉजिटिव है तो इसका मतलब मरीज को पहले कभी डेंगू हो चुका हैं। आइजीएम का तात्पर्य डेंगू के फ्रेस वायरस से है।

इनका कहना है...

‘एलिजा टेस्ट डेंगू का कन्फर्म टेस्ट है। इसलिए यह टेस्ट मान्य है। वैसे डॉक्टर अपनी सूझबूझ से मरीज को राहत पहुंचाने के लिए कई तरह के टेस्ट करवाते हैं।

- डॉ. बलवंत मंडा, सीएमएचओ